Sonitpur | असम के नामेरी टाइगर रिजर्व को बाघ संरक्षण और संरक्षित वन क्षेत्र के प्रभावी प्रबंधन के लिए वैश्विक मान्यता मिली है। नामेरी को ‘Conservation Assured | Tiger Standards’ (CATS) के तहत ‘CATS Approved’ दर्जा प्रदान किया गया है। इसके साथ ही असम के सभी चार बाघ अभयारण्य अब CATS Approved दर्जे वाले अभयारण्य बन गए हैं। क्षेत्र निदेशक पिराइसूदन बी. ने गुरुवार को जारी बयान में बताया कि नामेरी ने बाघ संरक्षण और संरक्षित क्षेत्र प्रबंधन से जुड़े निर्धारित मानकों को पूरा किया है। जरूरी आकलन की प्रक्रिया पूरी होने और CATS की अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी समिति से मंजूरी मिलने के बाद नामेरी को यह दर्जा 10 सितंबर को प्रदान किया गया।
क्या है CATS मान्यता?
CATS बाघ अभयारण्यों और संरक्षित क्षेत्रों के प्रबंधन का आकलन करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त एक ढांचा है। इसके तहत किसी क्षेत्र में बाघ संरक्षण के साथ-साथ वन क्षेत्र के प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था का भी मूल्यांकन किया जाता है। इस आकलन में कई महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया जाता है, जिनमें वन्यजीव संरक्षण, बाघों के आवास का प्रबंधन, वन्यजीव निगरानी, प्रशासनिक व्यवस्था और स्थानीय समुदायों की भागीदारी प्रमुख हैं। CATS Approved दर्जा मिलने का अर्थ है कि संबंधित बाघ अभयारण्य ने संरक्षण और प्रबंधन से जुड़े निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रदर्शन किया है।
असम के चारों टाइगर रिजर्व अब CATS Approved
नामेरी को CATS Approved दर्जा मिलने के बाद असम के सभी चार बाघ अभयारण्य इस वैश्विक मान्यता के दायरे में आ गए हैं। इनमें शामिल हैं:
- काजीरंगा टाइगर रिजर्व
- मानस टाइगर रिजर्व
- ओरांग टाइगर रिजर्व
- नामेरी टाइगर रिजर्व
इस उपलब्धि को राज्य में बाघ संरक्षण और संरक्षित वन क्षेत्रों के प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सोनितपुर जिले में स्थित है नामेरी
नामेरी राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व असम के सोनितपुर जिले के उत्तरी हिस्से में स्थित है। यह क्षेत्र अपनी जैव विविधता और वन्यजीवों के लिए जाना जाता है। CATS मूल्यांकन के तहत संरक्षण गतिविधियों के साथ-साथ वन्यजीवों के आवास, निगरानी व्यवस्था और स्थानीय समुदायों की भागीदारी जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाता है। नामेरी को CATS Approved दर्जा मिलने से असम में बाघ संरक्षण के प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और पहचान मिली है। इसके साथ ही राज्य के चारों बाघ अभयारण्य अब इस वैश्विक संरक्षण मानक के तहत मान्यता प्राप्त कर चुके हैं।