रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नारी शक्ति वंदन’ संकल्प को लेकर देशभर में सियासी माहौल गरमा गया है। संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की पहल को जहां केंद्र सरकार ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति करार दे रहा है। छत्तीसगढ़ में भी इस मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
महिलाओं को नीति निर्माण में भागीदारी देने की पहल
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के जरिए केंद्र सरकार महिलाओं को नीति निर्माण में बराबरी की भागीदारी देने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। इस कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने की बात कही गई है।
इसके साथ ही मातृ वंदना योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को पोषण के लिए 5 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। सरकार का दावा है कि इन योजनाओं से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।
सरकार गिना रही योजनाओं के फायदे
राज्य सरकार भी महिला सशक्तिकरण को लेकर अपनी योजनाओं को सामने रख रही है। प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं—
- संसद और विधानसभा में 33% आरक्षण का प्रस्ताव
- मातृ वंदना योजना के तहत ₹5000 सहायता
- महतारी वंदन योजना के जरिए 70 लाख महिलाओं को ₹1000 प्रतिमाह
- पंचायतों में 50% आरक्षण, महिलाओं की 57% भागीदारी
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का समर्थन
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्र की इस पहल का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि इससे महिलाओं की निर्णय लेने की भूमिका और मजबूत होगी। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य में पहले से पंचायत स्तर पर 50 प्रतिशत आरक्षण लागू है और महिलाओं की भागीदारी 57 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। साथ ही महतारी वंदन योजना के जरिए लाखों महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है।
कांग्रेस का पलटवार
वहीं कांग्रेस ने इस मुद्दे पर बीजेपी को घेरते हुए कहा कि महिलाओं के आरक्षण की नींव पहले ही रखी जा चुकी थी। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि अब इसे राजनीतिक मजबूरी में लागू किया जा रहा है और सरकार इसका श्रेय लेने की कोशिश कर रही है।
जमीन पर असर को लेकर सवाल
नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर जहां एक ओर सरकार इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा और ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसकी मंशा पर सवाल उठा रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि यह पहल वास्तव में जमीनी स्तर पर महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व को कितना मजबूत बना पाती है।