प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ‘नशा मुक्त युवा के लिए विकसित भारत संकल्प अभियान’ का शुभारंभ करते हुए देश में मादक पदार्थों के विरुद्ध एक व्यापक जनआंदोलन का आह्वान किया। यह अभियान आगामी 100 सप्ताह तक निरंतर चलने वाला राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम होगा, जिसका उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक के रूप में उनकी सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करना है। इस अभियान के अंतर्गत प्रत्येक रविवार देशभर में विविध जनजागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा, जिनमें युवाओं, सामाजिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वयंसेवी समूहों तथा स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी मानना है कि मादक पदार्थों की बढ़ती चुनौती का समाधान केवल कानून-व्यवस्था से नहीं, बल्कि सतत सामाजिक जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता से ही संभव है।
‘विकसित भारत’ के लक्ष्य में स्वस्थ और जागरूक युवाशक्ति की निर्णायक भूमिका
अभियान का शुभारंभ करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सामूहिक प्रयासों की शक्ति किसी भी सामाजिक चुनौती का प्रभावी समाधान प्रस्तुत कर सकती है। उन्होंने कहा कि देशभर के लाखों युवाओं द्वारा नशे से दूर रहने का लिया गया संकल्प केवल व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार जब भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है, तब यह आवश्यक है कि युवाओं का शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और आत्मविश्वास मजबूत बना रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि मादक पदार्थों की लत केवल व्यक्ति की क्षमता को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र की उत्पादक शक्ति पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है। विशेषज्ञ भी इस बात पर बल देते हैं कि युवा आबादी किसी भी देश की सबसे बड़ी पूंजी होती है और उसका स्वस्थ रहना दीर्घकालिक आर्थिक एवं सामाजिक विकास के लिए अनिवार्य है।
काशी से प्रारंभ हुई पहल अब राष्ट्रीय जनभागीदारी का स्वरूप
प्रधानमंत्री ने बताया कि इस अभियान की शुरुआत पिछले वर्ष काशी में एक पायलट परियोजना के रूप में की गई थी, जहाँ इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। उन्हीं अनुभवों के आधार पर अब इसे राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित किया गया है। उन्होंने जानकारी दी कि देशभर के 125 से अधिक आध्यात्मिक संगठन इस अभियान से जुड़े हैं और युवाओं में जागरूकता फैलाने के लिए सक्रिय सहयोग प्रदान कर रहे हैं। सामाजिक वैज्ञानिकों का मानना है कि जब धार्मिक, सांस्कृतिक और सामुदायिक संस्थाएँ किसी सामाजिक अभियान का हिस्सा बनती हैं, तब उसका प्रभाव अधिक व्यापक और स्थायी होता है। यही कारण है कि इस पहल को केवल सरकारी कार्यक्रम न मानकर सामाजिक उत्तरदायित्व के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
मादक पदार्थों के कारोबार पर सरकार की सख्ती का उल्लेख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार नशे के अवैध कारोबार के विरुद्ध कठोर कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों की तुलना में मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामलों में कई गुना अधिक गिरफ्तारियाँ हुई हैं तथा हजारों करोड़ रुपये मूल्य के प्रतिबंधित मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई करना नहीं, बल्कि युवाओं को इस विनाशकारी जाल से सुरक्षित रखना भी है। सुरक्षा और कानून प्रवर्तन से जुड़े विशेषज्ञों का भी मानना है कि नशे के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण के लिए कठोर कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ सीमा सुरक्षा, खुफिया समन्वय और सामाजिक जागरूकता का समान महत्व है।
परिवार में संवाद और समय पर उपचार की आवश्यकता पर विशेष बल
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में परिवारों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यदि कोई युवा या किशोर अनजाने में नशे की लत का शिकार हो जाए तो उसे सामाजिक प्रतिष्ठा के भय से छिपाने के बजाय समय पर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि माता-पिता और अभिभावकों को बच्चों के साथ खुला संवाद स्थापित करना चाहिए ताकि वे मानसिक दबाव, सामाजिक प्रभाव या जिज्ञासावश नशे की ओर बढ़ने से पहले ही उचित मार्गदर्शन प्राप्त कर सकें। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार किशोरावस्था में संवादहीनता, तनाव और सामाजिक दबाव कई बार युवाओं को गलत दिशा में ले जाते हैं, जबकि समय पर परामर्श और पारिवारिक सहयोग उन्हें सामान्य जीवन की ओर लौटाने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध होता है।
युवाओं से आत्मविश्वास और भविष्य की रक्षा का आह्वान
अपने संबोधन के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री ने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने जीवन, करियर और परिवार के भविष्य को ध्यान में रखते हुए किसी भी प्रकार के नशे से स्वयं को दूर रखें। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थ क्षणिक उत्साह का भ्रम अवश्य उत्पन्न करते हैं, किंतु अंततः व्यक्ति की शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, सामाजिक सम्मान और पारिवारिक जीवन को गंभीर क्षति पहुँचाते हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे स्वयं नशे से दूर रहें और अपने मित्रों तथा समाज को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करें। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युवा वर्ग स्वयं जागरूक होकर सामाजिक नेतृत्व की भूमिका निभाए तो मादक पदार्थों के विरुद्ध चलाया जाने वाला कोई भी अभियान अधिक प्रभावी और स्थायी परिणाम दे सकता है। इसी दृष्टि से यह 100 सप्ताह का अभियान केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्वस्थ, जागरूक और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में एक व्यापक सामाजिक आंदोलन के रूप में देखा जा रहा है।