देश में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण की प्रगति इस वर्ष अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही है। राज्यसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025–26 में तीसरे सप्ताह मार्च तक कुल 8,600 किलोमीटर सड़कों का निर्माण हुआ है, जबकि लक्ष्य 10,000 किलोमीटर का निर्धारित किया गया था। यह अंतर स्पष्ट रूप से संकेत देता है कि निर्माण कार्य की गति में गिरावट आई है, जो बुनियादी ढांचे के विकास के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
निर्माण की गति में लगातार गिरावट
आंकड़ों के विश्लेषण से यह भी सामने आता है कि पिछले वर्षों की तुलना में निर्माण की औसत गति में कमी आई है। वर्तमान वर्ष में यह गति लगभग 23.74 किलोमीटर प्रतिदिन रही, जबकि पिछले वर्ष यह 29.21 किलोमीटर प्रतिदिन और उससे पहले 33.83 किलोमीटर प्रतिदिन तक पहुंची थी। वर्ष 2020–21 में यह आंकड़ा सर्वाधिक रहा था, जब रिकॉर्ड स्तर पर 13,327 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया गया था। यह गिरावट न केवल वर्तमान प्रगति को प्रभावित करती है, बल्कि भविष्य की योजनाओं पर भी असर डाल सकती है।
मंत्रालय की प्रतिक्रिया और आंकड़ों की प्रस्तुति
यह जानकारी केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा सदन में दी गई। उन्होंने एक प्रश्न के उत्तर में इन आंकड़ों को साझा करते हुए वर्तमान स्थिति की स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत की। यह पारदर्शिता यह दर्शाती है कि सरकार इस विषय पर गंभीरता से नजर बनाए हुए है, हालांकि गिरती गति के कारणों पर गहन विश्लेषण की आवश्यकता बनी हुई है।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का बेहतर प्रदर्शन
जहां एक ओर कुल निर्माण में कमी देखी जा रही है, वहीं भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने अपने निर्धारित लक्ष्य को पार करने का दावा किया है। प्राधिकरण के अनुसार, उसने 5,313 किलोमीटर राजमार्गों का निर्माण किया, जो निर्धारित लक्ष्य से लगभग 15 प्रतिशत अधिक है। इसके साथ ही पूंजीगत व्यय भी निर्धारित बजट से अधिक रहा, जो यह दर्शाता है कि संसाधनों का उपयोग सक्रिय रूप से किया गया है।
विभिन्न एजेंसियों की भूमिका और जिम्मेदारी
राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण, रखरखाव और प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की होती है, लेकिन इसके अतिरिक्त अन्य एजेंसियां भी इस कार्य में योगदान देती हैं। सीमावर्ती और पर्वतीय क्षेत्रों में निर्माण कार्य एक विशेष निगम द्वारा किया जाता है, जबकि कुछ परियोजनाएं केंद्रीय लोक निर्माण विभाग और राज्य स्तर के लोक निर्माण विभागों के माध्यम से भी पूरी की जाती हैं। यह बहु-स्तरीय व्यवस्था देश के विविध भौगोलिक क्षेत्रों में निर्माण कार्य को संभव बनाती है।
गिरावट के संभावित कारण और भविष्य की चुनौती
निर्माण की गति में आई कमी के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं, जैसे परियोजनाओं में देरी, भूमि अधिग्रहण की समस्याएं, वित्तीय बाधाएं या मौसम संबंधी प्रभाव। इन चुनौतियों का समाधान करना आवश्यक होगा, ताकि भविष्य में निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा किया जा सके। यदि इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो देश के बुनियादी ढांचे के विकास की गति प्रभावित हो सकती है।