नोएडा/नई दिल्ली: औद्योगिक शहर नोएडा में श्रमिकों का गुस्सा अब सड़कों पर खुलकर दिखाई दे रहा है। न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने के सरकारी फैसले के बावजूद हजारों मजदूर विरोध प्रदर्शन, धरना और सड़क जाम के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि प्रशासन और पुलिस को लगातार मोर्चा संभालना पड़ रहा है।
रातों-रात 21% मजदूरी बढ़ोतरी, फिर भी असंतोष बरकरार
उत्तर प्रदेश सरकार ने हालात काबू में करने के लिए अचानक करीब 21 प्रतिशत तक न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का फैसला लिया। इसके तहत अकुशल श्रमिकों की मजदूरी बढ़ाकर लगभग 13,690 रुपये, अर्ध-कुशल श्रमिकों की 15,069 रुपये और कुशल श्रमिकों की 16,868 रुपये कर दी गई। लेकिन श्रमिक संगठनों का कहना है कि यह बढ़ोतरी उनकी वास्तविक जरूरतों के मुकाबले अभी भी नाकाफी है।
तीन साल से मामूली बढ़ोतरी, अब फूटा गुस्सा
प्रदर्शन कर रहे मजदूरों का आरोप है कि पिछले तीन वर्षों में मजदूरी में बेहद मामूली बढ़ोतरी हुई, जो कई बार सिर्फ 20 से 80 रुपये तक सीमित रही। लगातार ज्ञापन देने और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बढ़ती महंगाई और जीवन यापन की कठिनाइयों ने अब उन्हें आंदोलन के लिए मजबूर कर दिया है।
फैक्ट्रियों के गेट बंद, सड़कों पर जाम
नोएडा के कई औद्योगिक सेक्टरों में फैक्ट्री गेट पर ताले लगे हुए हैं और मजदूरों ने सड़कों को जाम कर दिया है। महिला और पुरुष दोनों बड़ी संख्या में इस आंदोलन में शामिल हैं। प्रदर्शन के दौरान कई जगह पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की भी खबरें सामने आई हैं।
हरियाणा तक पहुंची आंदोलन की आंच
यह आंदोलन अब नोएडा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हरियाणा के फरीदाबाद जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में भी इसका असर देखा जा रहा है। इससे केंद्र सरकार की चिंता भी बढ़ गई है और हालात को जल्द नियंत्रित करने के निर्देश दिए गए हैं।
400 से ज्यादा गिरफ्तार, साजिश के आरोप
उत्तर प्रदेश पुलिस ने अब तक करीब 400 लोगों को हिरासत में लिया है। प्रशासन का दावा है कि कुछ असामाजिक तत्व और बाहरी लोग इस आंदोलन को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। व्हाट्सऐप ग्रुप्स के जरिए अशांति फैलाने की बात भी सामने आई है, हालांकि श्रमिक संगठनों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
श्रमिकों की पीड़ा: ‘देखिए हम कैसे जीते हैं’
प्रदर्शन के दौरान महिला श्रमिकों ने अपनी फटी चप्पलें, पुराने कपड़े और टूटे टिफिन बॉक्स दिखाकर अधिकारियों के सामने अपनी हालत बयां की। उनका कहना है कि लंबी ड्यूटी के बावजूद उन्हें ओवरटाइम का भुगतान नहीं मिलता और काम के घंटे लगातार बढ़ाए जा रहे हैं।
योगी सरकार के लिए बड़ी चुनौती
नोएडा जैसे हाई-प्रोफाइल औद्योगिक शहर में इस तरह का उग्र श्रमिक आंदोलन योगी आदित्यनाथ सरकार के लिए बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौती बन गया है। फिलहाल सरकार और प्रशासन दोनों ही इस आंदोलन को शांत करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन मजदूरों की नाराजगी कम होती नजर नहीं आ रही है।