मुंबई: देश के चर्चित शराब ब्रांड Old Monk को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में चल रहा नियामकीय विवाद अब उत्पाद की पहचान और लेबलिंग तक पहुंच गया है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने अदालत में कहा है कि मौजूदा संरचना वाले Old Monk को ‘Rum’ के तौर पर बेचना उचित नहीं है और इसे ‘Rum-Flavoured Spirit’ के रूप में पेश किया जा सकता है। मामला Old Monk के लेबल और उसमें इस्तेमाल स्पिरिट व फ्लेवरिंग से जुड़ा है। FSSAI का कहना है कि उत्पाद में न्यूट्रल स्पिरिट प्रमुख मात्रा में है, जबकि मैच्योर रम स्पिरिट 5 प्रतिशत से कम है। दूसरी ओर, निर्माता कंपनी ने नियामक की दलीलों पर अपना पक्ष रखा है और संशोधित लेबल अदालत के सामने पेश किया है।
‘रम’ या ‘रम-फ्लेवर्ड स्पिरिट’? FSSAI की दलील
बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान FSSAI की ओर से कहा गया कि उसकी आपत्ति केवल बोतल पर लिखे लेबल तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्पाद की प्रकृति से भी जुड़ी है। नियामक के मुताबिक, न्यूट्रल स्पिरिट में रम फ्लेवरिंग मिलाकर तैयार उत्पाद को सीधे ‘रम’ के तौर पर बेचना नियमों के अनुरूप नहीं है। FSSAI ने 2018 के अल्कोहलिक बेवरेज रेगुलेशन का हवाला देते हुए कहा कि रम में उससे जुड़ा विशिष्ट स्वाद और सुगंध होना चाहिए। केंद्र की ओर से भी अदालत में दलील दी गई कि जब उत्पाद में न्यूट्रल स्पिरिट का हिस्सा बहुत अधिक हो और मैच्योर रम की मात्रा लगभग 2-5 प्रतिशत हो, तो उसे केवल ‘रम’ के रूप में पेश करना उपभोक्ता को भ्रमित कर सकता है।
‘7 Years Old Blended’ दावे पर भी हाईकोर्ट की आपत्ति
मामले में Old Monk की बोतल पर लिखे ‘7 Years Old Blended’ दावे ने भी अदालत का ध्यान खींचा। हाईकोर्ट ने सवाल किया कि क्या इस तरह की भाषा से एक सामान्य उपभोक्ता यह समझ सकता है कि बोतल में मौजूद पूरी शराब सात साल पुरानी है। अदालत ने लेबल पर फ्लेवरिंग से जुड़ी जानकारी के बेहद छोटे अक्षरों में होने पर भी सवाल उठाए। सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने टिप्पणी की कि सामान्य उपभोक्ता के लिए इतनी छोटी जानकारी पढ़ना मुश्किल हो सकता है।
निर्माता कंपनी लेबल बदलने को तैयार
अदालत की आपत्तियों के बाद Old Monk की निर्माता कंपनी Mohan Rocky Springwater/Mohan Meakin ने लेबल में बदलाव करने पर सहमति जताई। कंपनी ने ‘7 Years Old Blended’ का उल्लेख हटाने और added flavour की जानकारी को अधिक प्रमुखता से प्रदर्शित करने का आश्वासन दिया है। संशोधित लेबल अदालत के सामने भी पेश किया गया। हालांकि, कंपनी ने FSSAI की व्याख्या से जुड़े अपने तर्क भी अदालत के सामने रखे हैं। उसका पक्ष है कि लेबलिंग और इस्तेमाल किए गए फ्लेवरिंग से जुड़े नियमों के तहत उसके उत्पाद की स्थिति अलग तरीके से देखी जानी चाहिए।
महाराष्ट्र में बिक्री पर रोक से कंपनी को नुकसान का दावा
इस विवाद का सीधा असर महाराष्ट्र में Old Monk की बिक्री पर भी पड़ा है। कंपनी की ओर से अदालत में दावा किया गया कि बिक्री पर रोक के चलते उसे करीब 120 दिनों तक प्रतिदिन लगभग ₹1 करोड़ का नुकसान हुआ। हाईकोर्ट ने फिलहाल बिक्री रोकने वाले FSSAI आदेश पर तत्काल अंतरिम राहत नहीं दी है। FSSAI अब कंपनी की ओर से दाखिल किए गए संशोधित लेबल की जांच करना चाहता है। नियामक ने इसके लिए अतिरिक्त समय मांगा है।
11 सितंबर को फिर होगी सुनवाई
संशोधित लेबल अदालत के सामने आने के बाद FSSAI ने उसका तकनीकी परीक्षण करने के लिए समय मांगा। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है। इस सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि संशोधित लेबल FSSAI की आपत्तियों को पूरा करता है या नहीं और Old Monk के संबंधित उत्पादों को किस नाम और किस तरह की जानकारी के साथ बाजार में बेचने की अनुमति मिलती है।
सिर्फ Old Monk तक सीमित नहीं है विवाद
यह नियामकीय कार्रवाई केवल Old Monk तक सीमित नहीं रही है। FSSAI की जांच में कुछ अन्य प्रमुख अल्कोहलिक बेवरेज ब्रांड भी फ्लेवरिंग और लेबलिंग से जुड़े सवालों के घेरे में आए हैं। इनमें McDowell’s No. 1 Rum, Antiquity Blue, Royal Challenge और Bagpiper जैसे उत्पादों का भी उल्लेख किया गया है। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि Old Monk का नाम हमेशा के लिए ‘Rum’ से बदलकर ‘Rum-Flavoured Spirit’ हो जाएगा। 11 सितंबर की सुनवाई और FSSAI की समीक्षा के बाद तस्वीर अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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