नई दिल्ली – देश में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल के पीछे सरकार की नीयत साफ नहीं है और यह कदम केवल चुनावी लाभ के लिए उठाया गया है।
विपक्ष का बड़ा बयान: समर्थन लेकिन शर्तों पर आपत्ति
विपक्षी दलों की बैठक के बाद मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन सरकार ने इसे लागू करने के लिए जो शर्तें रखी हैं-जनगणना और परिसीमन-वे इस कानून को लंबे समय तक टालने का माध्यम बन सकती हैं।
खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार संवैधानिक प्रक्रिया को दरकिनार कर राजनीतिक फायदा लेने की कोशिश कर रही है।
‘नीतिगत चाल’ का आरोप, सरकार पर तीखा हमला
खरगे ने कहा कि सरकार पहले भी परिसीमन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता नहीं दिखा पाई है। उन्होंने दावा किया कि असम और जम्मू-कश्मीर के परिसीमन जैसे उदाहरणों में भी विपक्ष को भरोसे में नहीं लिया गया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं की शक्तियों को कमजोर करने की कोशिश बताया।
तुरंत लागू करने की मांग
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी कहा कि महिला आरक्षण का लाभ तुरंत मिलना चाहिए, लेकिन इसे परिसीमन और जनगणना की शर्तों में उलझाना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार इस प्रक्रिया को जानबूझकर जटिल बना रही है ताकि इसका वास्तविक लाभ देर से मिले।
आरक्षण के भीतर कोटा की मांग भी उठी
विपक्ष की एक और प्रमुख मांग यह है कि इस 33% आरक्षण के भीतर पिछड़े वर्ग (OBC) की महिलाओं के लिए अलग से कोटा तय किया जाए। उनका कहना है कि ऐसा न होने पर सामाजिक प्रतिनिधित्व असंतुलित हो सकता है।
दक्षिण भारतीय दलों ने भी चिंता जताई है कि परिसीमन के बाद राजनीतिक संतुलन उत्तर और दक्षिण भारत के बीच असमान हो सकता है।
महिला सशक्तिकरण बनाम राजनीतिक टकराव
जहां एक तरफ सरकार इसे महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की ऐतिहासिक पहल बता रही है, वहीं विपक्ष इसे लागू करने के तरीके और समय को लेकर सवाल उठा रहा है।