नई दिल्ली. दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के लिए 5 सितंबर 2026 का दिन ऐतिहासिक महत्व रखता है। कॉलेज के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शाम 7 बजे शामिल होंगे और उपस्थित जनसमूह को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी इसकी आधिकारिक पुष्टि की है। वर्ष 1926 में स्थापित यह संस्थान वाणिज्य, अर्थशास्त्र और प्रबंधन के क्षेत्र में देश के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में गिना जाता है। शताब्दी समारोह का आयोजन शिक्षक दिवस के अवसर पर भी हो रहा है, जिससे कार्यक्रम का महत्व और बढ़ गया है। लेकिन इस समारोह की सबसे बड़ी चर्चा प्रधानमंत्री की 13 साल बाद उसी परिसर में वापसी को लेकर है, जहां उन्होंने 2013 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में युवाओं के सामने अपनी राजनीतिक और विकास संबंधी सोच रखी थी।
6 फरवरी 2013 का वह संबोधन आज भी क्यों याद किया जाता है
6 फरवरी 2013 को नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स पहुंचे थे। उस समय देश में 2014 के लोकसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल धीरे-धीरे गर्म हो रहा था और मोदी राष्ट्रीय राजनीति में एक प्रमुख चेहरे के रूप में उभर रहे थे। उनका संबोधन मुख्य रूप से वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में उभरते कारोबारी मॉडल, विकास और युवाओं की भूमिका पर केंद्रित था। उन्होंने गुजरात के विकास अनुभव को सुशासन और जनकेंद्रित प्रशासन से जोड़ते हुए देश की प्रगति के लिए बेहतर शासन व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया था। उनके उस भाषण को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि उन्होंने राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दों के बजाय विकास, युवा शक्ति, अवसर और भारत की वैश्विक क्षमता जैसे विषयों पर अपना ध्यान केंद्रित रखा था।
करीब 1800 छात्रों के बीच बना था अलग माहौल
2013 में मोदी के कार्यक्रम के बाहर विरोध प्रदर्शन भी हुआ था, लेकिन सभागार के भीतर बड़ी संख्या में छात्र उनका भाषण सुनने के लिए मौजूद थे। विभिन्न समकालीन रिपोर्टों के अनुसार करीब 1800 से 2000 छात्र और अन्य लोग कार्यक्रम में शामिल हुए थे। लगभग 75 मिनट लंबे संबोधन के दौरान युवाओं के बीच उनकी संवाद शैली चर्चा का विषय बनी रही और कई छात्रों ने उनके विचारों तथा वक्तृत्व की सराहना की। बाहर विरोध और भीतर उत्सुकता से भरे छात्रों का यह विरोधाभासी दृश्य उस समय दिल्ली के राजनीतिक माहौल में काफी चर्चित रहा था। खास बात यह थी कि मोदी ने अपने भाषण को चुनावी राजनीति की सीधी भाषा में रखने के बजाय युवाओं, विकास और अवसरों के इर्द-गिर्द केंद्रित रखा। यही कारण रहा कि उनका श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स संबोधन आने वाले समय में उनके राष्ट्रीय राजनीतिक उभार की कहानी में बार-बार संदर्भित किया गया।
सुशासन और युवा शक्ति बना था भाषण का केंद्रीय संदेश
2013 के उस भाषण में नरेंद्र मोदी ने सुशासन को विकास की आधारभूत शर्त के रूप में प्रस्तुत किया था। उन्होंने कहा था कि आजादी के 6 दशक बाद भी देश को प्रभावी सुशासन की आवश्यकता है और गुजरात के अनुभव को इसी संदर्भ में सामने रखा था। युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने देश की मानव संसाधन क्षमता को पूरी तरह इस्तेमाल करने की जरूरत पर भी जोर दिया था। उनका संदेश था कि युवा केवल समस्याओं और आर्थिक परिस्थितियों की शिकायत करने के बजाय उपलब्ध अवसरों का इस्तेमाल करके परिवर्तन का हिस्सा बनें। इसी संबोधन में उन्होंने भारत की युवा आबादी और उसकी क्षमता को देश की सबसे बड़ी ताकतों में से एक के रूप में रेखांकित किया था। बाद के वर्षों में युवाओं को केंद्र में रखकर राजनीतिक संवाद की जो शैली मोदी की राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी, उसके शुरुआती सार्वजनिक उदाहरणों में श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स का यह कार्यक्रम प्रमुख माना जाता है।
उस समय से आज तक बदल चुका है राजनीतिक परिदृश्य
2013 और 2026 के बीच भारतीय राजनीति में व्यापक परिवर्तन आया है। 2013 में नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और राष्ट्रीय स्तर पर उनकी संभावित भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो रही थीं। इसके अगले वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने बहुमत हासिल किया और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने। इसके बाद 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में भी उनके नेतृत्व में पार्टी ने केंद्र में सरकार बनाई। अब जब वह 13 साल बाद उसी संस्थान के मंच पर प्रधानमंत्री के रूप में लौट रहे हैं, तो उनकी राजनीतिक यात्रा का एक लंबा अध्याय उस परिसर की स्मृतियों से जुड़ता दिखाई देता है। यही वजह है कि उनकी वापसी को केवल किसी शैक्षणिक संस्थान के समारोह में भागीदारी के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे उनके राजनीतिक सफर के एक प्रतीकात्मक पड़ाव के तौर पर भी याद किया जा रहा है।
युवाओं तक पहुंच की राजनीति का बदलता तरीका
पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक दलों और नेताओं के युवा संपर्क के तरीकों में भी बड़ा बदलाव आया है। सामाजिक माध्यम, छोटे वीडियो, सीधे संवाद और विश्वविद्यालय परिसरों में कार्यक्रम अब राजनीतिक संचार के महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं। नरेंद्र मोदी स्वयं युवाओं के साथ संवाद के लिए विभिन्न डिजिटल और प्रत्यक्ष मंचों का इस्तेमाल करते रहे हैं। लेकिन 2013 का श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स कार्यक्रम उस दौर में हुआ था जब सामाजिक माध्यम आधारित राजनीतिक संपर्क आज की तरह व्यापक नहीं था। तब किसी विश्वविद्यालय या महाविद्यालय के मंच से युवाओं को सीधे संबोधित करना और उनके बीच अपनी विकास संबंधी सोच रखना राजनीतिक संचार का महत्वपूर्ण माध्यम था। इस दृष्टि से देखा जाए तो श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स का वह संबोधन मोदी की उस शैली का शुरुआती उदाहरण था जिसमें युवाओं को केवल मतदाता के रूप में नहीं, बल्कि देश की विकास यात्रा के भागीदार के रूप में संबोधित किया गया।
13 साल बाद मंच वही, भूमिका पूरी तरह अलग
प्रधानमंत्री के रूप में श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स लौटने के पीछे सबसे दिलचस्प पहलू यही है कि मंच वही है, लेकिन समय और भूमिका दोनों बदल चुके हैं। 2013 में मोदी एक राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में राष्ट्रीय राजनीति में अपनी संभावित भूमिका मजबूत कर रहे थे, जबकि 2026 में वह देश के प्रधानमंत्री के रूप में कॉलेज के शताब्दी समारोह में पहुंच रहे हैं। उस समय उनका भाषण छात्रों को विकास, सुशासन और अवसरों के बारे में संबोधित कर रहा था; आज उनकी वापसी ऐसे समय में हो रही है जब भारत की अर्थव्यवस्था, शिक्षा, तकनीकी परिवर्तन और वैश्विक भूमिका पर युवाओं की अपेक्षाएं पहले से कहीं अधिक बड़ी हैं। इसलिए इस बार उनका संबोधन केवल अतीत की याद को दोहराने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नई पीढ़ी और बदलते भारत के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जाएगा। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार शताब्दी समारोह में उनका संबोधन कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा होगा।
पुराने भाषण की गूंज और आज की नई पीढ़ी
श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में मोदी की 13 साल बाद वापसी एक ऐसी राजनीतिक स्मृति को फिर सामने ला रही है, जिसमें एक मुख्यमंत्री ने युवाओं के बीच खड़े होकर विकास और सुशासन को अपने संवाद का केंद्र बनाया था। उस समय मौजूद छात्रों की पीढ़ी आज देश के विभिन्न क्षेत्रों में पेशेवर, उद्यमी और नीति-निर्माण से जुड़े दायित्व निभा रही है। दूसरी ओर, आज कॉलेज के सामने मौजूद नई पीढ़ी की चुनौतियां भी बदल चुकी हैं, जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोजगार, वैश्विक प्रतिस्पर्धा, उद्यमिता और बदलती अर्थव्यवस्था जैसे विषय शामिल हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री की वापसी अतीत और वर्तमान के बीच एक दिलचस्प सेतु बनाती है। 2013 में जिस मंच से उन्होंने युवाओं को अवसरों का लाभ उठाने और देश के विकास में योगदान देने का संदेश दिया था, उसी मंच से 2026 में वह शताब्दी वर्ष के अवसर पर नई पीढ़ी के सामने भारत की अगली दिशा पर अपनी बात रखेंगे।