राजस्थान - राजस्थान में 309 शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव के बाद अब पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी सिलसिले में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन जयपुर पहुंचे, जहां उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, सांसदों, विधायकों और पदाधिकारियों के साथ बैठक कर आगामी पंचायत चुनाव की तैयारियों पर चर्चा की।
टिकट की सिफारिश को लेकर नेताओं को चेतावनी
बैठक के दौरान नितिन नवीन ने पार्टी नेताओं की जिम्मेदारी को लेकर स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यदि किसी सांसद या विधायक की सिफारिश पर किसी व्यक्ति को पार्टी का टिकट मिलता है और चुनाव जीतने के बाद वह पार्टी लाइन के खिलाफ जाता है, तो संबंधित उम्मीदवार के साथ सिफारिश करने वाले नेता की भूमिका और जवाबदेही भी तय होगी।
पार्टी नेतृत्व का यह रुख खासतौर पर स्थानीय चुनावों में उम्मीदवारों के चयन और संगठन के भीतर अनुशासन बनाए रखने से जुड़ा है। पंचायत चुनावों में बड़ी संख्या में स्थानीय स्तर के उम्मीदवार मैदान में उतरेंगे, ऐसे में टिकट वितरण को लेकर पार्टी के भीतर समन्वय महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुंडवा के नतीजे से मिला सबक
बीजेपी की चिंता के पीछे हालिया मुंडवा नगरपालिका अध्यक्ष चुनाव का घटनाक्रम भी बताया जा रहा है। नागौर जिले की 25 सदस्यीय मुंडवा नगरपालिका में बीजेपी 10 पार्षदों के साथ सबसे बड़ा दल बनी थी। इसके बावजूद पार्टी की आधिकारिक अध्यक्ष पद की उम्मीदवार गीता देवी को एक भी वोट नहीं मिला।
वहीं कांग्रेस और आरएलपी के समर्थन वाली अलका देवी कंदोई को 13 वोट मिले और उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार घनश्याम सादावत को 12 वोटों से हराया। रिपोर्टों के मुताबिक, बीजेपी के सभी 10 पार्षद होने के बावजूद पार्टी उम्मीदवार के पक्ष में कोई वोट नहीं पड़ा।
पंचायत चुनाव में संगठन पर फोकस
मुंडवा के घटनाक्रम के बाद बीजेपी नेतृत्व स्थानीय स्तर पर पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के समर्थन और संगठनात्मक अनुशासन को लेकर सतर्क दिखाई दे रहा है। पंचायत चुनावों में ग्राम पंचायत से लेकर अन्य पंचायती राज संस्थाओं तक बड़ी संख्या में पदों पर चुनाव होना है। ऐसे में पार्टी के सामने उम्मीदवारों के चयन से लेकर चुनाव के बाद संगठन के साथ समन्वय बनाए रखने की चुनौती रहेगी।
शहरी चुनाव के आंकड़ों पर भी चर्चा
राजस्थान के 309 शहरी स्थानीय निकायों के हालिया चुनाव में 10,245 पार्षद पदों के लिए मतदान हुआ था। इन चुनावों में करीब 1.44 करोड़ मतदाता शामिल थे। राज्य चुनाव परिणामों के अनुसार बीजेपी 148 शहरी निकायों में सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई, जबकि कांग्रेस 104 निकायों में आगे रही।
नेताओं को सादगी और कार्यकर्ताओं से जुड़ने की सलाह
बैठक में नितिन नवीन ने पार्टी नेताओं को सार्वजनिक जीवन में सादगी बनाए रखने और आम लोगों के बीच सक्रिय रहने की सलाह दी। उन्होंने संगठन के जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ सीधे संवाद बढ़ाने और व्यक्तिगत आचरण के जरिए पार्टी की छवि मजबूत करने पर जोर दिया।
आगामी पंचायत चुनावों में ग्रामीण मतदाताओं की बड़ी भागीदारी होगी। ऐसे में बीजेपी का फोकस संगठनात्मक अनुशासन, उम्मीदवार चयन और बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की सक्रियता पर रहने की संभावना है। चुनाव कार्यक्रम और अंतिम आंकड़े निर्वाचन आयोग की अधिसूचनाओं के अनुसार स्पष्ट होंगे।