मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक देश की मुद्रा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार केंद्रीय बैंक पॉलीमर बैंक नोटों का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी में है। दुनिया के कई देशों में पहले से इस्तेमाल हो रहे ये प्लास्टिक नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में ज्यादा मजबूत, लंबे समय तक चलने वाले और सुरक्षा की दृष्टि से अधिक भरोसेमंद माने जाते हैं। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद ही इन्हें पूरे देश में चरणबद्ध तरीके से जारी किया जाएगा।
10 और 20 रुपये के नोटों से होगी शुरुआत
सूत्रों का कहना है कि शुरुआती चरण में 10 और 20 रुपये के पॉलीमर नोट जारी किए जा सकते हैं। ये दोनों मूल्यवर्ग आम लोगों के दैनिक लेनदेन में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होते हैं, इसलिए इनके जरिए नई तकनीक की व्यवहारिकता को परखा जाएगा। यदि पायलट सफल रहता है तो बाद में अन्य मूल्यवर्ग के नोट भी पॉलीमर सब्सट्रेट पर छापे जा सकते हैं। इस बदलाव का उद्देश्य केवल नोटों का स्वरूप बदलना नहीं, बल्कि उनकी उम्र बढ़ाना और नकली नोटों के खतरे को कम करना भी है।
एडवांस सुरक्षा फीचर्स होंगे शामिल
प्लास्टिक नोटों में अत्याधुनिक सुरक्षा फीचर्स जोड़े जाने की तैयारी है। इनमें पारदर्शी विंडो, विशेष होलोग्राम, माइक्रो प्रिंटिंग, रंग बदलने वाली स्याही और मशीन से आसानी से पहचाने जाने वाले सुरक्षा तत्व शामिल हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पॉलीमर नोटों की नकल करना पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में कहीं अधिक कठिन होता है। इससे नकली मुद्रा के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिल सकती है और बैंकिंग प्रणाली की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।
कागजी नोट बंद नहीं होंगे
RBI ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि पॉलीमर नोटों की शुरुआत का मतलब मौजूदा कागजी नोटों को बंद करना नहीं है। बाजार में चल रहे सभी वैध बैंक नोट पहले की तरह कानूनी मुद्रा बने रहेंगे और उनका इस्तेमाल जारी रहेगा। प्लास्टिक नोट फिलहाल एक अतिरिक्त विकल्प के रूप में सिस्टम में शामिल किए जाएंगे। यानी लोगों को अपने पुराने नोट बदलवाने की कोई तत्काल जरूरत नहीं होगी और दोनों तरह की करेंसी कुछ समय तक साथ-साथ चल सकती है।
वैश्विक टेंडर जारी, 18 अगस्त तक आवेदन
इस परियोजना को लागू करने के लिए RBI की नोट मुद्रण शाखा ने पॉलीमर सब्सट्रेट शीट्स की आपूर्ति के लिए वैश्विक अभिरुचि आमंत्रण (EOI) जारी किया है। इसके तहत अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को भारत के लिए प्लास्टिक नोटों का बेस मटीरियल उपलब्ध कराने के लिए आमंत्रित किया गया है। बोली जमा करने की अंतिम तिथि 18 अगस्त तय की गई है। इससे साफ है कि केंद्रीय बैंक परियोजना को तकनीकी और गुणवत्ता मानकों के साथ आगे बढ़ाना चाहता है, ताकि भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल सबसे बेहतर सामग्री का चयन किया जा सके।
2027 से बड़े पैमाने पर हो सकता है रोलआउट
संभावना जताई जा रही है कि पायलट प्रोजेक्ट के परिणामों का मूल्यांकन करने के बाद 2027 से पॉलीमर नोटों का बड़े पैमाने पर वितरण शुरू किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह भारतीय करेंसी इतिहास का सबसे बड़ा तकनीकी बदलाव माना जाएगा। लंबे समय तक चलने वाले नोटों से सरकार की छपाई लागत कम हो सकती है, बैंकिंग व्यवस्था पर दबाव घट सकता है और पर्यावरणीय दृष्टि से भी लाभ मिल सकता है, क्योंकि बार-बार नोट बदलने की आवश्यकता कम होगी।
दुनिया के कई देशों में पहले से सफल प्रयोग
ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और सिंगापुर जैसे देशों में पॉलीमर नोट पहले से प्रचलन में हैं और वहां इनका प्रदर्शन काफी बेहतर माना गया है। ये नोट पानी से जल्दी खराब नहीं होते, गंदगी कम पकड़ते हैं और सामान्य कागजी नोटों की तुलना में कई गुना अधिक समय तक चलते हैं। भारत में भी यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो आने वाले वर्षों में लोगों की जेब में पारंपरिक कागज की जगह चमकदार और अधिक सुरक्षित प्लास्टिक नोट दिखाई दे सकते हैं।