पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी की पत्नी रुजिरा बनर्जी को लेकर कई गंभीर दावे सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। दस्तावेजों में कथित विरोधाभास को लेकर विपक्ष ने राज्य सरकार और तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधना शुरू कर दिया है।
दो पैन कार्ड और अलग-अलग पहचान का दावा
सामने आयी जानकारी के अनुसार रुजिरा बनर्जी के नाम से दो अलग-अलग पैन कार्ड होने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि दोनों दस्तावेजों में पिता के नाम अलग-अलग दर्ज हैं। एक दस्तावेज में पिता का नाम निपन नरूला बताया गया है, जबकि दूसरे में गुरचरण आहूजा का उल्लेख होने की बात कही जा रही है। इसी के साथ पीआईओ और ओसीआई कार्ड में दर्ज सूचनाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि अलग-अलग दस्तावेजों में अलग पहचान और पारिवारिक जानकारी दर्ज होना गंभीर जांच का विषय है।
विदेशी नागरिकता को लेकर भी बढ़ा विवाद
विवाद का एक बड़ा हिस्सा रुजिरा बनर्जी की कथित विदेशी नागरिकता से जुड़ा हुआ है। आरोप लगाया जा रहा है कि उनके पास थाईलैंड की नागरिकता और वहां का पासपोर्ट है। विपक्ष का दावा है कि भारत में वित्तीय दस्तावेज बनवाते समय विदेशी नागरिकता की जानकारी पूरी तरह साझा नहीं की गयी। हालांकि इन आरोपों को लेकर अब तक रुजिरा बनर्जी या तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आयी है।
पुराने मामलों को लेकर फिर तेज हुई चर्चा
रुजिरा बनर्जी का नाम इससे पहले भी कथित सोना तस्करी और कोयला घोटाला जांच के दौरान चर्चा में आ चुका है। अब नये दस्तावेजी विवाद सामने आने के बाद विपक्ष इन पुराने मामलों को भी जोड़कर सवाल उठा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा असर डाल सकता है।
भाजपा ने साधा निशाना
भारतीय जनता पार्टी ने इस पूरे मामले को लेकर तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करायी जाये और यदि किसी प्रकार की दस्तावेजी गड़बड़ी पायी जाती है तो कानूनी कार्रवाई की जाये। भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी से सार्वजनिक स्पष्टीकरण देने की मांग भी की है।
सोशल मीडिया पर भी तेज हुई बहस
इस विवाद के सामने आने के बाद सामाजिक माध्यमों पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई लोग मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि तृणमूल समर्थक इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं। फिलहाल पूरे मामले पर आधिकारिक जांच एजेंसियों की ओर से कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है, लेकिन दस्तावेजों को लेकर उठे सवालों ने बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।