नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ‘संविधान हत्या दिवस’ के अवसर पर आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक काला अध्याय बताते हुए कहा कि यह दिन देशवासियों को लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा सजग और प्रतिबद्ध रहने की प्रेरणा देता है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि आज का दिन उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि देने का अवसर है, जिन्होंने भारत के इतिहास के सबसे कठिन दौरों में से एक, आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष किया।
आपातकाल संविधान पर सीधा हमला था
उन्होंने कहा कि आपातकाल संविधान पर सीधा हमला था। उस समय नागरिक स्वतंत्रताओं को सीमित कर दिया गया, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं, पत्रकारों तथा समाजसेवियों को गिरफ्तार किया गया। साथ ही लोकतंत्र की बुनियादी संस्थाओं को भी कमजोर करने का प्रयास किया गया प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दौर केवल चुनौतियों का नहीं था, बल्कि उन नागरिकों के साहस और दृढ़ संकल्प का भी प्रतीक था, जिन्होंने लोकतांत्रिक आदर्शों की रक्षा के लिए संघर्ष किया और अन्याय के सामने झुकने से इनकार कर दिया।
भारत का संविधान
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि भारत का संविधान 140 करोड़ देशवासियों की आकांक्षाओं, अधिकारों और कर्तव्यों का प्रतीक है। देश संविधान के मूल्यों की रक्षा और उन्हें मजबूत करने के लिए अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहराता है। उन्होंने कहा कि भारत न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्शों पर आधारित राष्ट्र निर्माण के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगा।
एक अन्य पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘संविधान हत्या दिवस’ उस काले दौर की याद दिलाता है, जब भारतीय लोकतंत्र को बुरी तरह कुचला गया था। उन्होंने आपातकाल का विरोध करने वाले सभी लोकतंत्र सेनानियों और विभूतियों को नमन करते हुए उनके योगदान को याद किया।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने एक संस्कृत सुभाषित भी साझा किया—
"स्वातन्त्र्यात् सुखमाप्नोति स्वातन्त्र्याल्लभते परम्।
स्वातन्त्र्यान्निर्वृत्तिं गच्छेत् स्वातन्त्र्यात् परमं पदम्॥"
इसका अर्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता ही सुख, सफलता, शांति और सर्वोच्च उपलब्धि का आधार है। स्वतंत्रता के माध्यम से ही व्यक्ति और समाज अपने सर्वोच्च लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं।