नई दिल्ली- आपातकाल की बरसी पर मनाए जा रहे 'संविधान हत्या दिवस' के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि भारत ऐसा राष्ट्र बनेगा जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के संवैधानिक आदर्शों के प्रति हमेशा समर्पित रहेगा।
आपातकाल को बताया लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय था। उस दौर में नागरिक स्वतंत्रताओं को छीन लिया गया, अभिव्यक्ति की आजादी पर अंकुश लगाया गया और राजनीतिक नेताओं, पत्रकारों व सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेलों में डाला गया।
लोकतंत्र बचाने वालों को दी श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री ने उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद अनेक लोगों ने संविधान के आदर्शों को जीवित रखने के लिए साहसिक भूमिका निभाई।
संविधान 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं का प्रतीक
पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों की आकांक्षाओं, अधिकारों और कर्तव्यों का प्रतीक है। उन्होंने देशवासियों से संवैधानिक मूल्यों की रक्षा और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने का आह्वान किया।
स्वतंत्रता और लोकतंत्र की रक्षा का लिया संकल्प
प्रधानमंत्री ने कहा कि संविधान हत्या दिवस हमें यह याद दिलाता है कि लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा के प्रति हमेशा सतर्क रहना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत संविधान की भावना से प्रेरित होकर आगे बढ़ेगा और लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा।
संस्कृत श्लोक के जरिए दिया संदेश
अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषित भी साझा किया, जिसमें स्वतंत्रता के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि मनुष्य सुख, सफलता और सर्वोच्च उपलब्धि स्वतंत्रता के माध्यम से ही प्राप्त करता है।