सावन का आखिरी सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से भोलेनाथ की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति आती है और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इस बार सावन के अंतिम सोमवार पर कई शुभ योग बन रहे हैं, जिससे शिव आराधना का महत्व और बढ़ गया है।
सावन के आखिरी सोमवार पर बन रहे हैं कई शुभ योग
सावन के अंतिम सोमवार को प्रीति योग और आयुष्मान योग का निर्माण हो रहा है। इसके अलावा इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और प्रदोष काल का भी विशेष संयोग बन रहा है।
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन शुभ योगों में भगवान शिव का पूजन और जलाभिषेक करने से पूजा का पुण्य फल बढ़ जाता है। भक्त इस दिन अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार भोलेनाथ का अभिषेक कर सकते हैं।
जलाभिषेक और पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
सावन के आखिरी सोमवार पर भगवान शिव की पूजा के लिए दिनभर में कई शुभ समय बताए गए हैं। भक्त अपनी सुविधा के अनुसार इन मुहूर्तों में शिवलिंग का जलाभिषेक और पूजन कर सकते हैं।
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:25 बजे से 5:10 बजे तक
सुबह की पूजा का श्रेष्ठ समय: सुबह 6:00 बजे से 9:15 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:50 बजे तक
प्रदोष काल: शाम 6:30 बजे से रात 8:30 बजे तक
इनमें प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
ऐसे करें भगवान शिव का जलाभिषेक
सावन सोमवार के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान शिव का ध्यान करें। इसके बाद शिवलिंग पर साफ जल अर्पित करें। श्रद्धा के अनुसार दूध, दही, शहद और गंगाजल से भी अभिषेक किया जा सकता है।
जलाभिषेक के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें। इसके बाद भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, फूल और फल अर्पित करें। शिवजी के साथ माता पार्वती की भी पूजा करें और अंत में धूप-दीप जलाकर आरती करें।
मनोकामना पूर्ति के लिए करें विशेष पूजा
धार्मिक मान्यता है कि सावन सोमवार को भगवान शिव की भक्ति करने से भक्तों को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। इस दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु दिनभर भगवान शिव का स्मरण और मंत्र जाप कर सकते हैं।विशेष रूप से बेलपत्र अर्पित करते समय भगवान शिव का ध्यान करना और महामृत्युंजय मंत्र या पंचाक्षरी मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।
प्रदोष काल में भी कर सकते हैं शिव आराधना
सावन के आखिरी सोमवार की शाम प्रदोष काल में भी शिव पूजा का विशेष महत्व है। शाम 6:30 बजे से रात 8:30 बजे तक श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक, दीपदान और आरती कर सकते हैं।धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन के अंतिम सोमवार पर शुभ योगों के बीच की गई शिव आराधना भक्तों के लिए विशेष फलदायी मानी जाती है।