Vande Mataram Controversy: वंदे मातरम् को लेकर देश में जारी राजनीतिक बहस के बीच शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला है। राउत ने प्रधानमंत्री मोदी को सीधे चुनौती देते हुए कहा कि वह मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में आएं और बिना किसी टेलीप्रॉम्प्टर की मदद के पूरा वंदे मातरम् गाकर दिखाएं। संजय राउत ने रविवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यदि प्रधानमंत्री और बीजेपी के अन्य नेता वंदे मातरम् को लेकर इतना जोर दे रहे हैं, तो उन्हें खुद सामने आकर पूरा गीत प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए मंच की व्यवस्था वह खुद करने को तैयार हैं, लेकिन वहां टेलीप्रॉम्प्टर नहीं होगा।
संजय राउत ने PM मोदी को क्या चुनौती दी?
वंदे मातरम् को लेकर चल रही सियासी बयानबाजी के बीच संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर तंज कसा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को आगे आकर बिना टेलीप्रॉम्प्टर देखे पूरा वंदे मातरम् गाकर दिखाना चाहिए। राउत ने इसी तरह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के दूसरे नेताओं को भी सामने आने की चुनौती दी। उनका कहना था कि अगर बीजेपी वंदे मातरम् को लेकर गंभीर है, तो उसके नेताओं को खुद इसे पूरा गाकर दिखाना चाहिए। उन्होंने मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह और बीजेपी के अन्य नेता वहां आ सकते हैं। राउत ने दावा किया कि उन्हें मंच उपलब्ध कराया जाएगा, लेकिन मंच पर टेलीप्रॉम्प्टर की सुविधा नहीं होगी।
‘अगस्त क्रांति मैदान में मंच हम देंगे’
संजय राउत ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में आमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बीजेपी के नेता वहां आएं और वंदे मातरम् का पूरा पाठ या गायन करके दिखाएं। राउत की इस टिप्पणी को वंदे मातरम् को लेकर बीजेपी और विपक्ष के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान का हिस्सा माना जा रहा है। उनका बयान सामने आने के बाद इस मुद्दे पर सियासी बहस और तेज होने की संभावना है।
वंदे मातरम् को लेकर क्यों गरमाया राजनीतिक माहौल?
वंदे मातरम् भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रवादी इतिहास से जुड़ा महत्वपूर्ण गीत है। अलग-अलग राजनीतिक दल समय-समय पर इसके सम्मान, गायन और इसके इस्तेमाल को लेकर अपनी राय रखते रहे हैं। मौजूदा विवाद में भी राजनीतिक दलों के बीच इसे लेकर अलग-अलग दावे और प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। बीजेपी की ओर से राष्ट्रवाद और देशभक्ति के मुद्दे पर जोर दिए जाने के बीच विपक्षी दल सरकार और बीजेपी नेताओं की राजनीति पर सवाल उठा रहे हैं। इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में संजय राउत का यह बयान सामने आया है।
महंगाई को लेकर भी केंद्र पर निशाना
संजय राउत ने सिर्फ वंदे मातरम् के मुद्दे तक अपनी बात सीमित नहीं रखी। उन्होंने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और महंगाई को लेकर भी प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि पिछले करीब 12 वर्षों में आम लोगों के लिए कौन-कौन सी चीजें सस्ती हुई हैं। राउत ने दावा किया कि आम आदमी की रोजमर्रा की परेशानियां कम नहीं हुई हैं और महंगाई का असर लगातार महसूस किया जा रहा है। शिवसेना (यूबीटी) नेता ने गन्ने और इथेनॉल उत्पादन का उदाहरण देते हुए भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गन्ने की आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इथेनॉल उत्पादन की ओर जाने से इससे जुड़े दूसरे आर्थिक पहलुओं पर भी चर्चा की जानी चाहिए।
Gen-Z से संवाद को लेकर भी साधा निशाना
संजय राउत ने सरकार के मंत्रियों और नेताओं द्वारा विश्वविद्यालयों में जाकर युवाओं, खासकर Gen-Z से संवाद किए जाने की पहल पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि नेताओं को केवल विश्वविद्यालय परिसरों में जाकर युवाओं से बातचीत करने के बजाय उनके घरों तक पहुंचना चाहिए। राउत के मुताबिक, युवाओं की वास्तविक समस्याओं को समझने के लिए उनके परिवारों और माता-पिता से भी बात करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब नेता आम लोगों की रसोई और घर की वास्तविक परिस्थितियों को देखेंगे, तभी उन्हें महंगाई और परिवारों के सामने मौजूद आर्थिक चुनौतियों की सही तस्वीर समझ में आएगी।
कांग्रेस ने भी बीजेपी पर साधा निशाना
वंदे मातरम् को लेकर चल रही बहस में कांग्रेस की ओर से भी बीजेपी के रुख की आलोचना की गई है। कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने बीजेपी के प्रस्ताव और उसके राजनीतिक रुख पर सवाल उठाते हुए इसे देश के कई प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं की विरासत से जोड़कर देखा। उन्होंने महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे नेताओं का उल्लेख करते हुए बीजेपी की राजनीति पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि बीजेपी के कुछ नेता देश के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े प्रमुख विचारों और राष्ट्रीय नेताओं की विरासत के विपरीत रुख अपना रहे हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक विरोधियों पर वैचारिक आरोप भी लगाए।
राजनीतिक बयानबाजी से और बढ़ सकती है बहस
वंदे मातरम् को लेकर सामने आ रहे बयान यह संकेत दे रहे हैं कि यह मुद्दा अब केवल राष्ट्रगीत और राष्ट्रवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का विषय भी बन चुका है। एक ओर बीजेपी इसे राष्ट्रवाद और देशभक्ति से जोड़कर देख रही है, वहीं विपक्षी दल सरकार पर इस मुद्दे के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में संजय राउत की प्रधानमंत्री मोदी को दी गई चुनौती ने विवाद को एक नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है। हालांकि, राउत की ओर से प्रधानमंत्री को अगस्त क्रांति मैदान में आने और बिना टेलीप्रॉम्प्टर वंदे मातरम् गाने की चुनौती पर बीजेपी की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है, यह देखना अहम होगा।