नई दिल्ली: सिविल जज परीक्षा की तैयारी कर रहे लॉ ग्रेजुएट्स के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। Civil Judge Exam 2026 की भर्ती में शामिल होने के लिए उम्मीदवारों को फिलहाल एक साल की लीगल प्रैक्टिस की अनिवार्यता नहीं होगी। हालांकि, 1 अप्रैल 2027 से एक साल की लीगल प्रैक्टिस की शर्त लागू होगी। सुप्रीम कोर्ट ने यह व्यवस्था फिलहाल तीन साल के पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू करने का फैसला किया है। इसके बाद इस व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी।
2026 में बिना लीगल प्रैक्टिस दे सकेंगे परीक्षा
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक, 2026 की सिविल जज भर्ती परीक्षा में लॉ ग्रेजुएट बिना किसी लीगल प्रैक्टिस के भी आवेदन कर सकेंगे। वहीं, 1 अप्रैल 2027 से सिविल जज परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के लिए कम से कम एक साल की लीगल प्रैक्टिस की शर्त लागू होगी। इस बदलाव से नए लॉ ग्रेजुएट्स को न्यायिक सेवा परीक्षा में सीधे शामिल होने का मौका मिलेगा।
तीन साल तक पायलट प्रोजेक्ट के तहत लागू रहेगा नियम
एक साल की लीगल प्रैक्टिस की व्यवस्था को फिलहाल तीन साल के पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा। तीन साल की अवधि पूरी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट इस व्यवस्था की समीक्षा करेगा। इस दौरान न्यायिक सेवा में चयनित उम्मीदवारों की ट्रेनिंग और उनके प्रदर्शन को भी महत्वपूर्ण माना जाएगा।
भर्ती के बाद पहले साल होगी ज्यूडिशियल ट्रेनिंग
सिविल जज के रूप में भर्ती होने के बाद उम्मीदवारों को शुरुआती अवधि में विशेष न्यायिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के तहत छह महीने जिला जज और छह महीने हाईकोर्ट जज के अधीन लॉ क्लर्कशिप कराई जाएगी। इस दौरान उम्मीदवारों को अदालत की कार्यप्रणाली और न्यायिक प्रक्रिया का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा।
शुरुआती दो साल मिलेगी करीब 70 हजार रुपये सैलरी
भर्ती के बाद शुरुआती दो साल की ट्रेनिंग अवधि में चयनित उम्मीदवारों को करीब 70 हजार रुपये की आधी सैलरी मिलने की जानकारी दी गई है। ट्रेनिंग और नौकरी पक्की होने के बाद पूरी सैलरी करीब 1.40 लाख रुपये होगी। इसके साथ अन्य सरकारी सुविधाएं भी मिलेंगी।
जिला जज भर्ती के लिए अलग रहेगी 7 साल की प्रैक्टिस की शर्त
सुप्रीम कोर्ट के इस बदलाव का असर सीधे सिविल जज भर्ती पर है। जिला जज भर्ती के लिए सात साल की लीगल प्रैक्टिस की शर्त बरकरार रहेगी। इसके अलावा जिला जज भर्ती के लिए 35 से 45 वर्ष की आयु सीमा की शर्त भी लागू रहेगी।
प्रदेश की निचली अदालतों में 400 से ज्यादा पद खाली
प्रदेश की निचली अदालतों में फिलहाल 400 से अधिक पद खाली बताए जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक वर्ष 2023 से 2026 तक के सभी रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया कराए जाने की तैयारी है। इससे बड़ी संख्या में लॉ ग्रेजुएट्स को न्यायिक सेवा में आने का अवसर मिल सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इससे करीब 90 प्रतिशत यानी 50 हजार से अधिक लॉ ग्रेजुएट्स को लाभ मिलने की उम्मीद है।
खाली सीटें कैरी फॉरवर्ड नहीं होंगी
नई व्यवस्था में बची हुई सीटों को अगले वर्ष के लिए कैरी फॉरवर्ड करने के बजाय नए सिरे से परीक्षा प्रक्रिया में शामिल किए जाने की बात कही गई है। इससे न्यायिक सेवा में रिक्त पदों को समय पर भरने और भर्ती प्रक्रिया को अधिक नियमित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
लॉ ग्रेजुएट्स के लिए क्या बदला?
- Civil Judge Exam 2026: बिना लीगल प्रैक्टिस भी परीक्षा दे सकेंगे।
- 1 अप्रैल 2027 से: एक साल की लीगल प्रैक्टिस जरूरी होगी।
- यह नियम शुरुआती तौर पर 3 साल के पायलट प्रोजेक्ट के तहत लागू होगा।
- भर्ती के बाद न्यायिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- पहले साल में 6 महीने जिला जज और 6 महीने हाईकोर्ट जज के अधीन प्रशिक्षण होगा।
- शुरुआती दो साल में करीब 70 हजार रुपये की आधी सैलरी।
- ट्रेनिंग के बाद करीब 1.40 लाख रुपये पूरी सैलरी और अन्य सुविधाएं।
- जिला जज भर्ती में 7 साल की प्रैक्टिस और 35-45 वर्ष की उम्र की शर्त रहेगी।