नई दिल्ली - मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन के विरोध मार्च में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी शामिल नहीं हुए। मंगलवार को दिल्ली में विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के खिलाफ मार्च निकाला और CEC के इस्तीफे तथा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सवाल उठाए। इस प्रदर्शन से दूरी बनाने पर ओवैसी ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। ओवैसी ने कहा कि AIMIM INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं है, इसलिए वह इस मार्च में शामिल नहीं हुए। उन्होंने इसे लेकर तंज करते हुए कहा, “बेगानी शादी में मेरा क्या काम?”
CEC के चयन की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
मार्च में शामिल नहीं होने के बावजूद ओवैसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में कार्यपालिका का प्रभाव अधिक है और इसमें बदलाव किया जाना चाहिए। ओवैसी ने मांग की कि CEC के चयन की प्रक्रिया में मुख्य न्यायाधीश (CJI), प्रधानमंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) को शामिल किया जाए। मौजूदा 2023 के कानून के तहत चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं।
बिहार SIR को लेकर भी विरोध
AIMIM प्रमुख ने बिहार में मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर भी अपनी आपत्ति दोहराई। ओवैसी का कहना है कि उन्होंने बिहार में SIR की प्रक्रिया शुरू होने के समय भी इसका विरोध किया था। उन्होंने SIR को लेकर दावा किया कि यह “पिछले दरवाजे से NRC” लागू करने जैसी प्रक्रिया है। यह ओवैसी की राजनीतिक राय और आरोप है; चुनाव आयोग और केंद्र की ओर से SIR को लेकर अलग रुख रखा गया है।
19 दलों ने निकाला चुनाव आयोग तक मार्च
इस बीच INDIA गठबंधन से जुड़े विपक्षी सांसदों ने दिल्ली में चुनाव आयोग की ओर मार्च किया। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR को लेकर आपत्तियां शामिल थीं। मार्च को पुलिस ने आगे बढ़ने से रोका, जिसके बाद कई विपक्षी नेताओं ने धरना दिया।
पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत विपक्ष के कई नेता शामिल थे। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने लगाए गए बैरिकेड को पार किया था, जिसके बाद कार्रवाई की गई। इस पूरे घटनाक्रम के बीच ओवैसी का मार्च से अलग रहना और CEC चयन प्रक्रिया में बदलाव की मांग करना विपक्षी राजनीति में एक अलग रुख को सामने रखता है।