इंदौर: देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों की तर्ज पर अब इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में भी श्रद्धालुओं और पुजारियों के लिए ड्रेस कोड लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। नई व्यवस्था के तहत तय और मर्यादित पहनावा अपनाने के बाद ही श्रद्धालुओं को मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश और पूजा-अभिषेक की अनुमति देने पर विचार किया जा रहा है। यह व्यवस्था उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर की तर्ज पर तैयार किए जाने की योजना है।
महाकाल मंदिर की व्यवस्था का होगा अध्ययन
इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा के अनुसार देश के कई प्रसिद्ध मंदिरों में गर्भगृह में प्रवेश के लिए विशेष परिधान की व्यवस्था पहले से लागू है। इसी को देखते हुए खजराना गणेश मंदिर की व्यवस्था का भी अध्ययन किया जा रहा है। इसके लिए विद्वान पुजारियों का एक पैनल बनाया जा रहा है। यह पैनल विभिन्न मंदिरों की परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट देगा। इसके बाद मंदिर प्रबंध समिति की अंतिम मंजूरी से ड्रेस कोड लागू किया जाएगा।
रंग नहीं, पहनावे का प्रकार होगा तय
मंदिर के मुख्य पुजारी अशोक भट्ट ने बताया कि ड्रेस कोड को लेकर प्रबंध समिति की बैठक में चर्चा हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी खास रंग या डिजाइन को अनिवार्य करने की योजना नहीं है। इसके बजाय पुरुषों और महिलाओं के लिए शालीन और पारंपरिक परिधान तय किए जाएंगे। इसका मुख्य उद्देश्य गर्भगृह में अनुशासन और धार्मिक वातावरण की मर्यादा बनाए रखना है।
अचानक आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी होगी व्यवस्था
ड्रेस कोड लागू होने के बाद अचानक दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को भी परेशानी न हो, इसके लिए मंदिर परिसर में ही निर्धारित परिधान उपलब्ध कराने पर विचार किया जा रहा है। खास अवसरों पर गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति पाने वाले यजमान और श्रद्धालु मंदिर समिति के माध्यम से परिधान प्राप्त कर सकेंगे।
अंतिम फैसला समिति की मंजूरी के बाद
फिलहाल ड्रेस कोड का अंतिम प्रारूप तैयार किया जा रहा है। पुजारियों के पैनल की रिपोर्ट और मंदिर प्रबंध समिति की मंजूरी के बाद नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद पुरुषों और महिलाओं के लिए निर्धारित पहनावे और गर्भगृह में प्रवेश से जुड़े सभी नियम सार्वजनिक किए जाएंगे।