तेहरान: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मोहसिन रेजाई ने चेतावनी दी है कि जो भी देश अमेरिका के ईरान के खिलाफ आर्थिक अभियान में शामिल होगा, उसे तेहरान अपना ‘दुश्मन’ मानेगा। सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव रेजाई ने शनिवार को सरकारी टीवी चैनल IRIB को दिए इंटरव्यू में कहा कि ईरान पहले ऐसे देशों से बातचीत करेगा और उन्हें अमेरिकी अभियान से दूर रहने की सलाह देगा। लेकिन अगर वे पीछे नहीं हटे तो ईरान उनके हितों को निशाना बना सकता है।
अमेरिका का साथ देने वाले देशों को चेतावनी
रेजाई ने कहा कि अगर क्षेत्र के देश अमेरिका की ओर से लगाए गए आर्थिक दबाव में शामिल होते हैं तो ईरान उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने यहां तक चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में हॉर्मुज स्ट्रेट से तेल का निर्यात भी प्रभावित किया जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने पिछले वर्षों में अमेरिकी प्रतिबंधों से निपटने और तेल की बिक्री जारी रखने के तरीके विकसित कर लिए हैं।
हॉर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान का सख्त रुख
मोहसिन रेजाई ने दोहराया कि हॉर्मुज स्ट्रेट तब तक बंद रहेगा, जब तक अमेरिका जून में हुए ईरान-अमेरिका समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करता। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति में अगला कदम अमेरिका को उठाना होगा। हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है। यहां किसी तरह का बड़ा व्यवधान वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों पर असर डाल सकता है।
ईरानी विदेश मंत्री ने भी अमेरिका पर साधा निशाना
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भी अमेरिकी आर्थिक अभियान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि अमेरिका की ओर से पहले लगाए गए कड़े प्रतिबंध और अधिकतम दबाव की रणनीति भी अपने लक्ष्य में सफल नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि नया अमेरिकी आर्थिक अभियान भी विफल होगा।
ट्रंप ने दी थी ‘अब तक के सबसे कठोर आर्थिक अभियान’ की चेतावनी
ईरान की ओर से यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को घोषणा की थी कि ईरान का समर्थन करने वाले देशों के खिलाफ अमेरिका ‘अब तक का सबसे कठोर आर्थिक अभियान’ शुरू करेगा। ट्रंप ने इसे अभूतपूर्व आर्थिक युद्ध और अलगाव की कार्रवाई बताते हुए ‘इकोनॉमिक डी-डे’ की संज्ञा दी थी।
क्या है अमेरिका-ईरान समझौते का मामला?
जानकारी के अनुसार, 18 जून को अमेरिका और ईरान ने क्षेत्र में जारी संघर्ष को खत्म करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें लेबनान से जुड़े मुद्दे भी शामिल थे। समझौते के तहत दोनों देशों को 60 दिनों के भीतर बातचीत के जरिए अंतिम समझौते तक पहुंचना था। यह समयसीमा सोमवार को समाप्त हो गई, लेकिन दोनों देशों के बीच पिछले महीने बढ़े तनाव के बाद बातचीत का भविष्य अभी भी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में ईरान की ताजा चेतावनी और अमेरिका की नई आर्थिक कार्रवाई ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। खास तौर पर हॉर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान के बयान से वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर संभावित असर को लेकर चिंता बढ़ सकती है।