मुंबई - अभिनेता विवेक ओबेरॉय इन दिनों नितेश तिवारी की मेगा बजट फिल्म 'रामायण' को लेकर सुर्खियों में हैं। फिल्म में वह विद्युतजिह्वा का किरदार निभा रहे हैं। इसी बीच ऐसी खबरें भी सामने आईं कि विवेक फिल्म से मिलने वाली अपनी पूरी फीस कैंसर पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए दान कर सकते हैं। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अलग से देखी जानी बाकी है।
विवेक अपनी दरियादिली के लिए पहले भी चर्चा में रहे हैं, लेकिन उनकी फिल्मी यात्रा की शुरुआत भी संघर्ष से भरी रही। उन्हें बॉलीवुड में आए दो दशक से ज्यादा का समय हो चुका है।
2002 में 'कंपनी' से किया डेब्यू
विवेक ओबेरॉय ने साल 2002 में राम गोपाल वर्मा की क्राइम ड्रामा फिल्म 'कंपनी' से बॉलीवुड में कदम रखा था। फिल्म में उन्होंने गैंगस्टर चंद्रकांत उर्फ 'चंदू' नागरे का किरदार निभाया था। अपने पहले ही बड़े पर्दे के किरदार में विवेक ने दमदार अभिनय किया और दर्शकों के साथ-साथ समीक्षकों का भी ध्यान खींचा।फिल्म में उनके साथ अजय देवगन, मनीषा कोइराला, मोहनलाल और अंतरा माली जैसे कलाकार नजर आए थे।
बेटे के लिए फिल्ममेकर्स के घर जाते थे सुरेश ओबेरॉय
हाल ही में विवेक के पिता और दिग्गज अभिनेता सुरेश ओबेरॉय ने एक इंटरव्यू में बताया कि बेटे को बॉलीवुड में पहला बड़ा मौका दिलाने के लिए उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ी थी। निधि वंसदानी के यूट्यूब चैनल पर बातचीत में सुरेश ओबेरॉय ने बताया कि वह विवेक की तस्वीरें लेकर फिल्ममेकर्स के घर जाते थे और उनसे बेटे को एक मौका देने की अपील करते थे। उन्होंने कहा कि जिस तरह उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों में खुद के लिए काम मांगा था, उसी तरह बेटे के लिए भी उन्हें दरवाजे खटखटाने पड़े।
राम गोपाल वर्मा को ऐसे पसंद आए विवेक
सुरेश ओबेरॉय उन दिनों राम गोपाल वर्मा के साथ एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें 'कंपनी' के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने राम गोपाल वर्मा से विवेक को फिल्म में मौका देने की बात की। हालांकि, राम गोपाल वर्मा सिर्फ सिफारिश के आधार पर विवेक को कास्ट करने के लिए तैयार नहीं थे। वह पहले यह देखना चाहते थे कि विवेक में अभिनेता के तौर पर कितना दम है।
एक्टिंग की रिकॉर्डिंग ने बदल दिया फैसला
विवेक के पास अपने एक्टिंग इंस्टीट्यूट की एक रिकॉर्डिंग थी। सुरेश ओबेरॉय ने वह रिकॉर्डिंग राम गोपाल वर्मा को दिखाई। इसके बाद आरजीवी उसे देखने के लिए सुरेश ओबेरॉय के घर पहुंचे। रिकॉर्डिंग देखने के बाद राम गोपाल वर्मा विवेक की एक्टिंग से प्रभावित हुए। इसके बाद उन्हें 'कंपनी' में चंदू नागरे का महत्वपूर्ण किरदार मिला और यही फिल्म उनके बॉलीवुड करियर की शुरुआत बनी।
पिता की मेहनत और बेटे की प्रतिभा का मिला साथ
विवेक ओबेरॉय के डेब्यू की यह कहानी बताती है कि फिल्म इंडस्ट्री में मौका मिलने के पीछे सिर्फ स्टार परिवार से होना ही पर्याप्त नहीं था। सुरेश ओबेरॉय ने बेटे के लिए फिल्ममेकर्स से मुलाकात की, लेकिन अंतिम फैसला विवेक की प्रतिभा देखने के बाद ही हुआ। 'कंपनी' की सफलता ने विवेक को बॉलीवुड में मजबूत शुरुआत दी और इसके बाद उन्होंने कई अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर अपनी पहचान बनाई। अब 'रामायण' जैसी बड़े बजट की फिल्म में उनका किरदार दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।