नई दिल्ली (25 सितंबर 2026): विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए उपयोग किए जाने वाले 'फॉर्म 6' को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 'इंडियन एक्सप्रेस' की एक खोजी रिपोर्ट के सामने आने के बाद निर्वाचन आयोग (ECI) पर सवाल उठने लगे, जिसके जवाब में आयोग ने औपचारिक प्रतिक्रिया दी है। आयोग का दावा है कि 'फॉर्म 6' के मूल वैधानिक ढांचे में कोई संशोधन नहीं किया गया है, बल्कि SIR प्रक्रिया से जुड़ा सवाल एक अलग घोषणा पत्र (अनेक्शर-डी) के रूप में जोड़ा गया है।
चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में दर्ज कराईं 14 आपत्तियां
'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 महीनों के दौरान चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग द्वारा बिना उनकी सहमति के लिए गए निर्णयों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराईं। इनमें 'फॉर्म 6' में किए गए बदलाव सबसे प्रमुख थे।मई 2026 में चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने फाइल पर लिखा था कि 'रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960' में केंद्र सरकार द्वारा आधिकारिक संशोधन किए बिना 'फॉर्म 6' में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता। इसके बाद 13 अगस्त को चुनाव आयुक्त संधू ने भी इस बदलाव को "अनधिकृत और अवैध" करार देते हुए इसे तुरंत हटाने की मांग की थी, ताकि नए और युवा मतदाताओं को परेशानी का सामना न करना पड़े। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओ.पी. रावत और पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने भी इन आपत्तियों का समर्थन किया है।
क्या है 'फॉर्म 6' से जुड़ा मुख्य विवाद?
'फॉर्म 6' वह वैधानिक दस्तावेज है, जिसे 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के नागरिक नया मतदाता बनने के लिए भरते हैं। सामान्य तौर पर इसमें नाम, आयु और पते जैसे बुनियादी प्रमाण मांगे जाते हैं। हालांकि, जुलाई 2026 से पोर्टल पर नए आवेदकों से यह पूछा जाने लगा कि अंतिम SIR के दौरान उनका, उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम मतदाता सूची में था या नहीं।यद्यपि इस प्रश्न को 'गैर-अनिवार्य' के रूप में चिन्हित किया गया था, लेकिन ऑनलाइन पोर्टल पर इसका उत्तर दिए बिना आवेदक फॉर्म जमा नहीं कर पा रहे थे। कई राज्यों में अंतिम SIR 2000 के दशक की शुरुआत में हुआ था, जिससे नए आवेदकों के लिए यह जानकारी जुटाना कठिन हो गया।
निर्वाचन आयोग ने क्या दिया स्पष्टीकरण?
विवाद बढ़ने पर भारत निर्वाचन आयोग ने तकनीकी अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि स्वीकृत 'फॉर्म 6' में कोई फेरबदल नहीं किया गया है। आयोग ने अपने बयान में कहा, "मौजूदा और अनुमोदित फॉर्म 6 के साथ माता-पिता या दादा-दादी से जुड़ा विवरण केवल एक अतिरिक्त घोषणा के रूप में संलग्न किया गया है"।आयोग ने 24 जून 2025 को जारी अपने दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि बिहार में प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही यह स्पष्ट कर दिया गया था कि फॉर्म 6 या फॉर्म 8 के साथ आवेदकों को 'अनेक्शर-डी' नामक एक अतिरिक्त घोषणा पत्र भरना होगा।