भारत में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की मांग तेजी से उभर रही है। एक ताजा वैश्विक अध्ययन में यह सामने आया है कि देश के अधिकांश अभिभावक इस कदम के पक्ष में हैं। डिजिटल युग में बच्चों पर बढ़ते प्रभाव को लेकर परिवारों में चिंता स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।
वैश्विक सर्वेक्षण में भारत दूसरे स्थान पर
ब्रिटेन की संस्था वर्की फाउंडेशन द्वारा जारी अध्ययन में भारत 75 प्रतिशत समर्थन के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि मलेशिया पहले स्थान पर है। इस शोध में कई देशों के परिवारों की राय शामिल की गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सोशल मीडिया का बच्चों पर प्रभाव एक वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है।
अभिभावकों की बढ़ती चिंता
अध्ययन में पाया गया कि माता-पिता अपने बच्चों के मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर चिंतित हैं। संस्था के संस्थापक सनी वर्की ने कहा कि डिजिटल तकनीक ने पारिवारिक संबंधों और युवाओं के मूल्यों को प्रभावित किया है, जिससे यह बहस और भी जरूरी हो गई है।
युवा पीढ़ी का भी समर्थन
चौंकाने वाली बात यह है कि ‘जेन जेड’ के 73 प्रतिशत युवाओं ने भी इस प्रतिबंध का समर्थन किया है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक है। यह दर्शाता है कि नई पीढ़ी भी सोशल मीडिया के प्रभाव को समझ रही है और संतुलित उपयोग की आवश्यकता को स्वीकार कर रही है।
दुनिया भर में अलग-अलग रुझान
इस सर्वेक्षण में कई देशों को शामिल किया गया, जिनमें भारत, फ्रांस, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश प्रमुख हैं। जहां भारत और मलेशिया में प्रतिबंध के पक्ष में अधिक समर्थन देखा गया, वहीं जापान में इसका समर्थन सबसे कम पाया गया। इससे स्पष्ट होता है कि अलग-अलग देशों में सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुसार दृष्टिकोण बदलता है।
ऑस्ट्रेलिया ने पहले ही उठाया कदम
ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला देश बन चुका है जिसने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लागू किया है। वहां भी दो-तिहाई अभिभावकों ने इस फैसले का समर्थन किया है। इसके बाद अन्य देश भी इस दिशा में विचार कर रहे हैं।
माता-पिता और बच्चों के बीच मतभेद
वैश्विक स्तर पर इस मुद्दे पर माता-पिता और बच्चों के बीच मतभेद भी देखने को मिले हैं। हालांकि भारत इस मामले में अलग नजर आता है, जहां दोनों वर्गों में अपेक्षाकृत अधिक सहमति है। यह संकेत देता है कि देश में डिजिटल जागरूकता तेजी से बढ़ रही है।
डिजिटल युग में संतुलन की चुनौती
सोशल मीडिया आज के समय का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसका संतुलित उपयोग ही लाभकारी है। बच्चों के मानसिक और सामाजिक विकास को ध्यान में रखते हुए यह जरूरी हो गया है कि तकनीक के उपयोग पर उचित दिशा-निर्देश बनाए जाएं। इस दिशा में नीति निर्माण और सामाजिक जागरूकता दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।