नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) की प्रक्रिया विवादों के घेरे में आ गई है। अपीलीय ट्रिब्यूनल के कामकाज के तरीकों पर सवाल उठाते हुए मामला अब देश की शीर्ष अदालत तक पहुंच गया है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय पर गंभीरता दिखाते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से तत्काल रिपोर्ट तलब करने का फैसला किया है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुई बहस?
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की खंडपीठ के समक्ष याचिकाकर्ताओं के वकील देवदत्त कामत ने ट्रिब्यूनल की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए:
वकीलों पर पाबंदी: वकील कामत ने दावा किया कि ट्रिब्यूनल वकीलों को प्रतिनिधित्व करने की अनुमति नहीं दे रहे हैं।
डिजिटल बाधा: फिजिकल आवेदन जमा करना बंद कर दिया गया है। केवल ऑनलाइन आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं, जिससे दूर-दराज के इलाकों से आने वाले और तकनीक से अनजान आम नागरिकों को भारी परेशानी हो रही है।
अदालती आदेश की अवहेलना: वकील ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के पिछले निर्देशों के बावजूद जमीनी स्तर पर ट्रिब्यूनल सही ढंग से काम नहीं कर रहे हैं, जिससे हजारों नागरिकों के मताधिकार पर संकट मंडरा रहा है।
शीर्ष अदालत का रुख
शुरुआत में मुख्य न्यायाधीश ने बार-बार नई याचिकाएं दायर करने पर थोड़ा असंतोष व्यक्त किया, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने कहा, "हम आज ही कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से इस संबंध में रिपोर्ट मांगेंगे।"
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले निर्देश दिया था कि जिन आवेदनों का निपटारा मतदान से दो दिन पहले तक हो जाएगा, उन्हें मताधिकार सुनिश्चित करना होगा। बंगाल में पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल और दूसरा चरण 29 अप्रैल को होना है।