नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एसआईआर के दौरान मृत व्यक्तियों वार्ड से बाहर चले गए लोगों या डुप्लीकेट नामों को मतदाता सूची से हटाने में कुछ गलत नहीं है। अदालत ने यह टिप्पणी आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों से जुड़े एक मामले में की। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की उस अपील को खारिज कर दिया जिसमें आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने एसआईआर पूरी होने तक स्थानीय निकाय चुनाव टालने की मांग खारिज कर दी थी। पीठ ने स्पष्ट शब्दों में एसआईआर प्रक्रिया को जायज ठहराया।
एसआईआर क्यों जरूरी
पीठ ने कहा कि एसआईआर जरूरी है क्योंकि मृत या स्थानांतरित लोगों को वार्ड में वोट डालने की अनुमति नहीं दी जा सकती। डुप्लीकेट नाम भी हटाने होते हैं और एसआईआर इन्हीं अनियमितताओं को दूर करता है। अदालत ने मतदाता सूची की शुद्धता और सटीकता पर जोर दिया। गलत नामों को सूची में बनाए रखने से चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसलिए पुनरीक्षण के दौरान ऐसे नामों को हटाना पूरी तरह सही और आवश्यक है। इस प्रक्रिया से लोकतंत्र की नींव मजबूत होती है।
चुनाव अधिसूचना और सूची का आधार
अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव अधिसूचना की तारीख पर जो अंतिम मतदाता सूची उपलब्ध होगी चाहे वह एसआईआर के बाद वाली हो या 1 जनवरी 2026 वाली उसी के आधार पर आंध्र प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनाव होंगे। राज्य चुनाव आयोग ने बताया कि चुनाव की तारीख अभी अधिसूचित नहीं हुई है और वह अधिसूचना की तारीख पर उपलब्ध अंतिम सूची का इस्तेमाल करेगा। पीठ इससे सहमत हुई और कहा कि अगर एसआईआर के बाद की अंतिम सूची अधिसूचना से पहले प्रकाशित नहीं होती तो 1 जनवरी 2026 की सूची पर चुनाव कराए जा सकते हैं।
हाईकोर्ट के फैसले की पुष्टि
सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा जिसमें एसआईआर पूरी होने तक चुनाव टालने की मांग खारिज की गई थी। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की अपील पर अदालत ने विस्तार से सुनवाई की और प्रक्रिया की वैधता को रेखांकित किया। पीठ ने कहा कि मतदाता सूची को स्वच्छ और अद्यतन रखना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने से किसी पात्र मतदाता के अधिकार का हनन नहीं होता बल्कि सूची की विश्वसनीयता बढ़ती है।
लोकतंत्र और चुनावी शुद्धता
इस फैसले से स्पष्ट हो गया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण चुनावी प्रक्रिया का अभिन्न अंग है। सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर को मृत स्थानांतरित और डुप्लीकेट नामों को हटाने का वैध माध्यम माना है। आंध्र प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनाव इसी आधार पर होंगे। अदालत का यह रुख पूरे देश में मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने के प्रयासों को मजबूती देता है। चुनावी लोकतंत्र में सटीक सूची होना आवश्यक है और एसआईआर इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।