कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही राज्य का राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया है। चुनाव आयोग (EC) और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच सीधा टकराव देखने को मिला। दिल्ली में आयोजित एक अहम बैठक महज 6 मिनट के भीतर हंगामे की भेंट चढ़ गई, जिसके बाद TMC प्रतिनिधिमंडल ने बैठक से वॉकआउट कर दिया।
10:02 बजे शुरू हुई बैठक, 10:08 पर वॉकआउट
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, बैठक सुबह 10:02 बजे शुरू हुई। TMC के प्रतिनिधिमंडल ने मेज पर अपनी शिकायतों का पुलिंदा रखा, जिसमें अधिकारियों के तबादले और नंदीग्राम जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए गए। लेकिन जैसे ही मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने बोलना शुरू किया, विवाद गहरा गया और मात्र 6 मिनट में यानी 10:08 बजे बैठक समाप्त हो गई।
टकराव की मुख्य वजह: नंदीग्राम और अधिकारियों के तबादले
TMC का आरोप है कि चुनाव आयोग द्वारा अधिकारियों के तबादलों में पक्षपात किया जा रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने निम्नलिखित मुख्य बिंदु उठाए:
- अधिकारियों के तबादले: राज्य में प्रशासनिक फेरबदल को लेकर TMC ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
- नंदीग्राम का मुद्दा: नंदीग्राम में निष्पक्ष चुनाव कराने को लेकर आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए गए।
हंगामा और आरोप-प्रत्यारोप
बैठक के बाद दोनों पक्षों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं:
- चुनाव आयोग का पक्ष: सूत्रों के मुताबिक, आयोग ने TMC नेता डेरेक ओ-ब्रायन पर हंगामे का आरोप लगाया है। कहा गया कि उन्होंने ऊंची आवाज में विरोध करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को उनकी बात पूरी नहीं करने दी।
- TMC का पलटवार: तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बैठक के दौरान CEC का व्यवहार अपमानजनक था। पार्टी का कहना है कि उन्हें अपनी बात रखने का पूरा मौका नहीं दिया गया और आयोग का रवैया एकतरफा है।
CEC का सख्त संदेश: "बिना भय के होगा चुनाव"
विवाद और हंगामे के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि -
"बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव बिना किसी भय, हिंसा या प्रलोभन के संपन्न कराए जाएंगे। आयोग निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।"
पुरानी रंजिश और बढ़ता तनाव
यह पहली बार नहीं है जब ममता बनर्जी की पार्टी और चुनाव आयोग आमने-सामने हों। इससे पहले भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और आयोग के बीच कई मौकों पर इसी तरह का टकराव देखा जा चुका है। जानकारों का मानना है कि चुनाव की तारीखों के करीब आते ही यह गतिरोध राज्य की कानून-व्यवस्था और चुनावी तैयारियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।