कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। विधानसभा चुनाव परिणाम आने के महज एक महीने के भीतर तृणमूल कांग्रेस में खुली बगावत सामने आ गई है। पार्टी के भीतर असंतोष अब सड़कों से निकलकर विधानसभा तक पहुंच गया है, जहां बागी विधायकों का एक बड़ा समूह अलग पहचान की मांग कर रहा है।
60 विधायकों के समर्थन का दावा
सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस के असंतुष्ट खेमे ने लगभग 60 विधायकों के समर्थन वाला पत्र तैयार किया है। इसी पत्र के साथ ऋतब्रत बंद्योपाध्याय और उनके समर्थक विधानसभा पहुंचे। माना जा रहा है कि यह कदम राज्य की विपक्षी राजनीति का नया समीकरण तय कर सकता है।
ऋतब्रत को नेता प्रतिपक्ष बनाने की मांग
बागी गुट विधानसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपकर ऋतब्रत बंद्योपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त करने की मांग करने जा रहा है। वहीं संदीपन साहा को उपनेता प्रतिपक्ष और मुर्शिदाबाद के विधायक अखरुज्जामान को मुख्य सचेतक बनाने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है।
जावेद खान, शिउली साहा और काजल शेख पर नजर
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जावेद खान, शिउली साहा और काजल शेख समेत कई विधायक इस नए गुट के साथ खड़े हो सकते हैं। हालांकि सभी नामों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन तृणमूल के भीतर बढ़ती नाराजगी ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।
बंगाल की राजनीति में नया अध्याय?
विश्लेषकों का मानना है कि यदि बागी गुट अपने दावे के अनुसार पर्याप्त संख्या में विधायकों का समर्थन जुटाने में सफल रहता है, तो विधानसभा के भीतर विपक्ष की राजनीति पूरी तरह बदल सकती है। इससे राज्य में तृणमूल कांग्रेस की संगठनात्मक स्थिति पर भी बड़ा असर पड़ सकता है।
पार्टी नेतृत्व की बढ़ी मुश्किलें
चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल पहले ही दबाव में थी। अब बड़ी संख्या में विधायकों के अलग रुख अपनाने से पार्टी के सामने संगठन को एकजुट रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। आने वाले दिनों में इस राजनीतिक घटनाक्रम पर सबकी नजर रहेगी।