कजाकिस्तान, जो विश्व में यूरेनियम का सबसे बड़ा उत्पादक देश माना जाता है, उसने भारत के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण कदम उठाते हुए परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को ईंधन देने के लिए नए करार पर सहमति दे दी है। कजाख सरकार की स्वामित्व वाली कंपनी कजाटोमप्रोम द्वारा की गई इस घोषणा को भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। भारत कई वर्षों से परमाणु ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने की दिशा में सक्रिय है, लेकिन यूरेनियम आपूर्ति का दबाव अक्सर इसकी राह में बाधा बनता रहा है। अब इस नए करार के बाद ऊर्जा नीति को नई स्थिरता मिलने की उम्मीद है।
भारत–कजाकिस्तान वार्ता और नया समझौता
भारत और कजाकिस्तान के बीच यूरेनियम आपूर्ति का पिछला समझौता समाप्त होने के बाद दोनों देशों के बीच नए करार के लिए कई वर्षों से चर्चा चल रही थी। हालांकि पिछले महीनों में यह वार्ता तेजी से आगे बढ़ी और अंततः एक नए समझौते का रूप ले पाई। यह करार भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग और कजाटोमप्रोम के बीच हालिया दौर की बातचीत के बाद अंतिम रूप से घोषित किया गया। इस घोषणा के साथ ही भारत को निरंतर और बड़े पैमाने पर यूरेनियम सप्लाई मिलने का मार्ग लगभग साफ हो गया है।
पुराने समझौतों से मिली आधारशिला
भारत और कजाकिस्तान के बीच यूरेनियम आपूर्ति संबंध दस वर्षों से अधिक पुराने हैं। वर्ष 2009 में पहला बड़ा समझौता हुआ, जिसके तहत भारत को 2100 टन यूरेनियम उपलब्ध कराया गया। इसके बाद 2015 में हुए नए करार के अंतर्गत कजाकिस्तान ने 2015 से 2019 के बीच 5000 टन यूरेनियम देने पर सहमति दी। इन समझौतों ने भारत के परमाणु ईंधन भंडार को मजबूत किया था, हालांकि नए करार का इंतजार लंबे समय से बना हुआ था, जो अब पूरा हो गया।
कौन है कजाटोमप्रोम और क्यों है यह कंपनी अहम
कजाटोमप्रोम कजाकिस्तान की सरकारी कंपनी है जो यूरेनियम खनन, दुर्लभ धातुओं के प्रसंस्करण और बेरिलियम एवं टैंटलम उत्पादों के निर्माण में अग्रणी मानी जाती है। कंपनी के उत्पादों का लगभग पूरा हिस्सा निर्यात किया जाता है, जो इसे वैश्विक यूरेनियम बाजार में सबसे प्रभावशाली खिलाड़ी बनाता है। कंपनी पर कजाख सरकार का सीधा नियंत्रण है और इसकी हिस्सेदारी का बड़ा भाग सरकारी कोष समरुककजीना के पास है। अपनी उच्च उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता मानकों के कारण भारत जैसी परमाणु ऊर्जा आधारित अर्थव्यवस्थाएं इस कंपनी पर भरोसा करती हैं।
भारत किन-किन देशों से लेता है यूरेनियम
भारत अपनी परमाणु ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कई देशों से यूरेनियम आयात करता है। रूस, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, फ्रांस और कनाडा इसके प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं। वर्ष 2012 में भारत ने ऑस्ट्रेलिया के साथ भी यूरेनियम खरीद समझौता किया था, किंतु ऑस्ट्रेलियाई सरकार के निर्णय बदलने के बाद उस समझौते का लाभ नहीं मिल सका। कजाकिस्तान जैसे विश्वसनीय साझेदार के साथ नया करार भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यह ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को और स्थिर करता है।
भारत की परमाणु ऊर्जा नीति को मिलेगी नई गति
परमाणु ऊर्जा भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का प्रमुख स्तंभ है। बढ़ती बिजली मांग, स्वच्छ ऊर्जा पर बल और कार्बन उत्सर्जन में कटौती के प्रयासों के बीच परमाणु ऊर्जा की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में यूरेनियम की सुनिश्चित आपूर्ति किसी भी परमाणु कार्यक्रम की सफलता का मूल आधार होती है। कजाकिस्तान का यह कदम भारत के लिए न केवल राहत लेकर आया है बल्कि भविष्य की ऊर्जा क्षमताओं को भी मजबूती प्रदान करेगा। आगामी वर्षों में भारत के न्यूक्लियर पावर प्लांट तेजी से विस्तार की उम्मीद कर रहे हैं, और यह करार उस दिशा का एक निर्णायक कदम है।
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