आज 13 अप्रैल को वरुथिनी एकादशी का पावन व्रत मनाया जा रहा है। वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की इस एकादशी को अत्यंत शुभ और सौभाग्य देने वाली तिथि माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी भक्त इस दिन भगवान विष्णु के मधुसूदन स्वरूप की श्रद्धा पूर्वक आराधना करते हैं, उन्हें हजारों वर्षों की तपस्या के समान पुण्य प्राप्त होता है। शास्त्रों में वरुथिनी एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि इस व्रत को करने से मानसिक और शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है तथा दान-पुण्य का फल कन्यादान के समान शुभ माना जाता है।
आज के शुभ मुहूर्त और पारण का समय
ज्योतिष गणना के अनुसार आज पूजा के लिए कई शुभ योग बन रहे हैं। सुबह 06:12 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक का समय पूजा-पाठ के लिए सबसे उत्तम माना गया है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु कल, यानी 14 अप्रैल को सुबह 05:56 से 08:30 बजे के बीच पारण कर सकते हैं। पारण हमेशा द्वादशी तिथि में करना शुभ माना जाता है।
आज की सरल पूजा विधि
इस दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराकर पीले वस्त्र, पीले पुष्प और चंदन अर्पित करें। उन्हें मौसमी फल जैसे आम या खरबूजा का भोग लगाएं। ध्यान रखें कि तुलसी दल के बिना भोग अधूरा माना जाता है। इसके बाद वरुथिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें और अंत में घी के दीपक से आरती करें।
आज इन बातों का रखें विशेष ध्यान
वरुथिनी एकादशी के नियमों का पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन चावल का सेवन वर्जित है। साथ ही झूठ बोलने, क्रोध करने और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। यदि कोई व्रत नहीं भी रख रहा है, तो भी उसे सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिए।