पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण को लेकर चुनावी तैयारियां अपने चरम पर हैं। 23 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले चुनाव आयोग ने सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कड़े नियम लागू कर दिए हैं। इस बार मतदान केंद्रों के आसपास सुरक्षा का घेरा पहले से कहीं ज्यादा सख्त रहेगा।
100 मीटर दायरे में ‘नो-एंट्री’ का कड़ा नियम
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान केंद्रों के 100 मीटर के भीतर केवल वैध मतदाताओं को ही प्रवेश मिलेगा। इस क्षेत्र में किसी भी बाहरी व्यक्ति, पार्टी कार्यकर्ता या भीड़ को आने की अनुमति नहीं होगी। इसका उद्देश्य मतदान प्रक्रिया को पूरी तरह शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाना है।
फर्जी वोटिंग रोकने के लिए ‘ट्रिपल लेयर’ चेकिंग
चुनाव आयोग ने इस बार फर्जी मतदान पर लगाम कसने के लिए तीन स्तर की सख्त जांच व्यवस्था लागू की है:
- पहला चरण: 100 मीटर सीमा के बाहर बीएलओ और अन्य अधिकारी मतदाताओं के पहचान पत्र की शुरुआती जांच करेंगे।
- दूसरा चरण: प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश के बाद एक और सत्यापन प्रक्रिया से गुजरना होगा।
- तीसरा चरण: मतदान केंद्र के ठीक पहले अंतिम जांच के बाद ही मतदाता को EVM तक पहुंचने दिया जाएगा।
इस मल्टी-लेयर सिस्टम से बिना सत्यापन के किसी का मतदान करना लगभग असंभव होगा।
मतदाता पर्ची वितरण पर भी सख्ती
आयोग ने यह भी सुनिश्चित किया है कि हर मतदाता तक उसकी पर्ची पहुंचे:
- बीएलओ को घर-घर जाकर पर्ची देने के निर्देश दिए गए हैं।
- जिन लोगों से संपर्क नहीं हो पाएगा, उनका रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
- अगर किसी मतदाता को पर्ची नहीं मिली है, तो भी वह पहचान पत्र और वोटर लिस्ट में नाम के आधार पर वोट डाल सकेगा।
निष्पक्ष चुनाव के लिए कड़ा सुरक्षा कवच
निर्वाचन आयोग का कहना है कि इस बार सुरक्षा व्यवस्था इतनी मजबूत रखी गई है कि किसी भी तरह की गड़बड़ी या फर्जी वोटिंग की गुंजाइश नहीं बचेगी। पूरे चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने पर खास जोर दिया जा रहा है।