मुर्शिदाबाद/कोलकाता:पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की पटकथा किसी थ्रिलर फिल्म जैसी नजर आ रही है, और इसका सबसे बड़ा केंद्र बना है नवाब सिराजुद्दौला का जिला— मुर्शिदाबाद। यहाँ लड़ाई केवल हार-जीत की नहीं, बल्कि अस्तित्व और साख की है। धुलियान से बेलडांगा तक, इस बार समीकरण इतने उलझे हुए हैं कि राजनीतिक विश्लेषक भी हैरान हैं।
अधीर चौधरी की 'रॉबिनहुड' वापसी
लोकसभा चुनाव में हार के बाद अधीर रंजन चौधरी अब विधानसभा के मैदान में हैं। 30 साल बाद फिर से राज्य की राजनीति में सक्रिय अधीर के लिए यह अपना 'गढ़' बचाने की आखिरी कोशिश है। हालांकि, उनके सामने तृणमूल के युसूफ पठान एक बड़ी चुनौती बनकर खड़े हैं, जो जमीन पर पकड़ मजबूत कर रहे हैं।
'SIR' और वोटर लिस्ट का धमाका
इस चुनाव में सबसे बड़ा 'नायक' या 'खलनायक' SIR (Sustained Inquiry Report) को माना जा रहा है। जिले के लगभग 7.5 लाख वोटरों के नाम सूची से काट दिए गए हैं, जिन्हें 'अवैध' बताया गया है। शमशेरगंज जैसे इलाकों में इसका सबसे ज्यादा असर है। विपक्षी दलों का आरोप है कि यह भाजपा की साजिश है, जबकि टीएमसी इसे चुनाव आयोग की 'एजेंसी' बता रही है। यह गुस्सा इवीएम में किस करवट बैठेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।
हुमायूं कबीर और 'स्टिंग' का साया
तृणमूल के बागी तेवर दिखाने वाले हुमायूं कबीर इस समय विवादों के केंद्र में हैं। उनका एक 'स्टिंग वीडियो' वायरल हुआ है जिसमें उन्हें अल्पसंख्यकों को लेकर विवादित टिप्पणी करते सुना जा रहा है। इसके साथ ही बेलडांगा में 'बाबरी मस्जिद' के निर्माण का मुद्दा और ओवैसी की पार्टी AIMIM (मीम) की एंट्री ने अल्पसंख्यक वोटों के ध्रुवीकरण की संभावना बढ़ा दी है।
हिंसा और पलायन के जख्म
धुलियान में हुई हिंसा और प्रवासी मजदूरों की मौत के मुद्दे भी चुनाव में हावी हैं। सामशेरगंज में हिंसा के शिकार परिवारों का भाजपा के पक्ष में प्रचार करना और गंगा के कटाव (River Erosion) की समस्या ने स्थानीय मुद्दों को गरमा दिया है।
प्रमुख सीटों पर नजर:
बहरामपुर: अधीर चौधरी बनाम भाजपा के सुब्रत मैत्र और टीएमसी के नाडुगोपाल मुखर्जी।
सागरदिघी: कांग्रेस से टीएमसी में आए बायरोन विश्वास की साख दांव पर।
डोमकल: पूर्व आईपीएस हुमायूं कबीर और वामपंथी मुस्तफिजुर राणा के बीच टक्कर।
मुर्शिदाबाद की 22 सीटें तय करेंगी कि बंगाल की सत्ता की चाबी किसके पास होगी। तृणमूल जहां 'विकास' और 105 सामाजिक योजनाओं के भरोसे है, वहीं कांग्रेस अपनी खोई जमीन तलाश रही है और भाजपा अपनी बढ़ती ताकत पर भरोसा कर रही है।