कोलकाता:पश्चिम बंगाल की राजनीतिक सरगर्मी के बीच स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बड़ी बहस छिड़ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पहली कैबिनेट बैठक में ही राज्य में 'आयुष्मान भारत' योजना लागू करने के ऐलान के बाद, अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या ममता सरकार की 'स्वास्थ्य साथी' योजना बंद हो जाएगी? और यदि ऐसा होता है, तो क्या आम जनता को मिलने वाली सुविधाओं में कटौती होगी?
नियमों की सख्ती पर बढ़ी चिंता
वर्तमान में ममता बनर्जी की 'स्वास्थ्य साथी' योजना के तहत राज्य के लगभग हर परिवार को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर मिलता है। दूसरी ओर, केंद्र की 'आयुष्मान भारत' योजना में सामाजिक-आर्थिक स्थिति और आयु (16-69 वर्ष के लिए आय सीमा और 70+ के लिए सार्वभौमिक) जैसे कड़े मानदंड हैं। बंगाल के करीब 2.5 करोड़ परिवार इस बात को लेकर चिंतित हैं कि क्या कार, फ्रिज या पक्का मकान होने पर उन्हें आयुष्मान कार्ड का लाभ नहीं मिलेगा?
BJP का आश्वासन: "किसी का हक नहीं मरेगा"
संभावित स्वास्थ्य मंत्री के रूप में चर्चित भाजपा नेता और चिकित्सक इंद्रनील खां ने इस संशय को दूर करने का प्रयास किया है। उन्होंने स्पष्ट किया:
"बंगाल में आयुष्मान भारत ही लागू होगा, लेकिन हम इस बात का पूरा ध्यान रखेंगे कि स्वास्थ्य साथी कार्ड धारकों को मिलने वाली मौजूदा सुविधाओं में कोई कमी न आए। सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज की व्यवस्था पहले की तरह ही जारी रहेगी।"
विशेषज्ञों और डॉक्टरों की मांग
सरकारी डॉक्टरों के संगठनों ने भी नई सरकार से मांग की है कि स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण कम किया जाए। 'सर्विस डॉक्टर्स फोरम' के सजल विश्वास का कहना है कि बीमा आधारित परियोजनाओं के जरिए सरकारी पैसा निजी व्यापारियों की जेब में जाने से रोका जाना चाहिए। वहीं, डॉ. मानस गुमटा ने उम्मीद जताई कि नई सरकार बिना किसी भेदभाव के सभी के लिए "निःशुल्क और उचित स्वास्थ्य सेवा" सुनिश्चित करेगी।बीजेपी सूत्रों का कहना है कि सरकार जनता के मन में किसी भी तरह की 'वंचना' (Deprivation) का भाव नहीं छोड़ना चाहती। ऐसे में उम्मीद है कि आयुष्मान भारत के ढांचे में कुछ स्थानीय बदलाव कर स्वास्थ्य साथी के लाभार्थियों को इसमें समाहित कर लिया जाएगा।