कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान तृणমূল कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि अगर भाजपा सत्ता में आई, तो बंगालियों का मछली और मांस खाना बंद हो जाएगा। हालांकि, चुनाव नतीजों के बाद तस्वीर बिल्कुल उलट नजर आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, राज्य की नई भाजपा सरकार 'मा कैंटीन' को बंद करने के बजाय उसे और बेहतर बनाने की योजना बना रही है।
अंडे की जगह अब मछली-चावल
नई सरकार के एक वरिष्ठ विधायक के अनुसार, "हम केवल अंडे तक सीमित नहीं रहना चाहते। बंगाली अपनी पहचान 'माछे-भाते' (मछली-चावल) से रखते हैं। इसलिए, मा कैंटीन के मेन्यू में अंडे की जगह अब मछली-चावल देने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है।" खास बात यह है कि भोजन की कीमत में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी; यह पहले की तरह मात्र 5 रुपये में ही उपलब्ध होगा।
बदला जा सकता है नाम
योजना को जारी रखते हुए सरकार इसका नाम बदलने की तैयारी में है। कृषि विपणन विभाग को इस मामले की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है। गौरतलब है कि 'सुफल बांग्ला' के माध्यम से इन कैंटीनों को सस्ती सब्जियां और सरकारी कोटे से मुफ्त चावल की आपूर्ति जारी रहेगी।
योजना का इतिहास
शुरुआत: 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी सरकार ने इसे शुरू किया था।
पहला केंद्र: दक्षिण कोलकाता के देशप्रिय पार्क से इसकी शुरुआत हुई थी।
विस्तार: 32 केंद्रों से शुरू होकर आज राज्य भर में लगभग 249 मा कैंटीन संचालित हैं।
उद्देश्य: सरकारी अस्पतालों में आने वाले गरीब मरीजों के परिजनों और श्रमिकों को मात्र 5 रुपये में दोपहर का भोजन (भात, दाल, सब्जी और अंडा) मुहैया कराना।
चुनाव के बाद कुछ स्थानों पर ये कैंटीन अस्थायी रूप से बंद हो गई थीं, लेकिन विजयी उम्मीदवारों ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही नए स्वरूप और नए नाम के साथ ये फिर से जनसेवा के लिए खुलेंगी।