इस वर्ष अक्षय तृतीया का पर्व 19 अप्रैल 2026, सोमवार को मनाया जाएगा। यह तिथि वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया होती है, जिसे हिंदू धर्म में बेहद शुभ माना गया है।
‘अक्षय’ का अर्थ और महत्व
‘अक्षय’ का अर्थ है—जिसका कभी क्षय न हो। मान्यता है कि इस दिन किए गए दान, जप और तप का फल कभी समाप्त नहीं होता। इसलिए यह दिन नई शुरुआत और सुख-समृद्धि के लिए विशेष माना जाता है।
धार्मिक और पौराणिक मान्यताएं
- शास्त्रों के अनुसार यह तिथि कई महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ी है—
- इसी दिन सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ हुआ
- भगवान परशुराम का जन्म हुआ
- महर्षि वेदव्यास ने महाभारत का वर्णन शुरू किया
- भगवान गणेश ने इसे लिखना प्रारंभ किया
- भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों को अक्षय पात्र प्रदान किया और सुदामा की दरिद्रता दूर की
इस दिन क्या करें?
- अक्षय तृतीया पर कुछ विशेष कार्य करना बेहद शुभ माना जाता है—
- जल, गुड़, सत्तू और पंखे का दान करें
- भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें
- पीले फूल और तुलसी दल अर्पित करें
- सोना-चांदी या मिट्टी का घड़ा खरीदना शुभ होता है
- मधुर वाणी और सकारात्मक व्यवहार अपनाएं
सात्विक जीवन और शुभ संकल्प
यह पर्व हमें अच्छे विचार और पुण्य कर्म अपनाने की प्रेरणा देता है। इस दिन बुरे विचारों से दूर रहकर सात्विक भोजन, भगवान का जाप और जरूरतमंदों की सेवा करने से जीवन में सुख-शांति आती है।
क्यों है खास यह दिन?
अक्षय तृतीया आत्मचिंतन, नई शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। सच्चे मन से किए गए कार्य इस दिन जीवन में स्थायी खुशियां लाते हैं।