पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में अमावस्या तिथि 18 मार्च को प्रातः 8:26 बजे प्रारंभ होगी और 19 मार्च को प्रातः 6:53 बजे समाप्त हो जाएगी। सनातन धर्म में किसी भी व्रत या पर्व के निर्धारण में उदया तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है। इसी कारण इस वर्ष चैत्र अमावस्या का पालन 19 मार्च को किया जाएगा। इस दिन श्रद्धालु प्रातःकाल पवित्र नदी या जलाशय में स्नान कर पितरों का तर्पण करते हैं तथा दान-पुण्य के माध्यम से पुण्य अर्जित करने का प्रयास करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि अमावस्या के दिन किए गए सत्कर्मों का फल कई गुना बढ़ जाता है।
स्नान और दान के प्रमुख शुभ मुहूर्त
चैत्र अमावस्या के दिन कुछ विशेष समय ऐसे माने जाते हैं, जिनमें पूजा, स्नान और दान का महत्व अधिक होता है। ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 5:08 से 5:56 बजे तक रहेगा, जबकि प्रातः संध्या मुहूर्त 5:32 से 6:44 बजे तक माना गया है। इसी प्रकार अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:22 से 1:11 बजे तक तथा विजय मुहूर्त दोपहर 2:47 से 3:36 बजे तक रहेगा। इन समयों में पूजा-पाठ, जप, तर्पण और दान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
पितृ तर्पण का विशेष महत्व
चैत्र अमावस्या को पितरों के स्मरण और तर्पण का विशेष दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन जल, तिल और कुश के साथ पितरों का तर्पण करने से वे प्रसन्न होते हैं और अपने वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। धर्मग्रंथों में कहा गया है कि अमावस्या के दिन पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना और उनके लिए दान-पुण्य करना पारिवारिक कल्याण का कारण बनता है। इसलिए अनेक श्रद्धालु इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराते हैं और जरूरतमंदों की सहायता भी करते हैं।
इन देवताओं की पूजा मानी जाती है फलदायी
चैत्र अमावस्या के दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव की आराधना को अत्यंत शुभ माना गया है। श्रद्धालु इस दिन मंत्र-जप, स्तोत्र पाठ और दीपदान करते हैं। इसके साथ ही पीपल वृक्ष की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि पीपल वृक्ष में दिव्य शक्तियों का वास होता है, इसलिए अमावस्या के दिन इसकी पूजा करने और दीप जलाने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और अनेक प्रकार के दोष शांत होते हैं।
इन वस्तुओं का दान करना माना जाता है शुभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चैत्र अमावस्या के दिन दान का विशेष महत्व है। इस दिन विशेष रूप से सफेद वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है। चावल, दूध, दही, चीनी, सफेद वस्त्र और तिल जैसी वस्तुओं का दान करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसके अतिरिक्त गरीब और जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा देना भी पुण्यकारी माना गया है। ऐसा विश्वास है कि इस दिन श्रद्धा और सेवा भाव से किया गया दान जीवन में सकारात्मक फल प्रदान करता है।
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