फाल्गुन मास की अमावस्या तिथि पर की गई पूजा और पितृ तर्पण के लिए विशेष फलदायी मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन किए गए धार्मिक अनुष्ठान न केवल पितरों को तृप्त करते हैं, बल्कि जीवन में बढ़ रही बाधाओं को भी दूर करते हैं। पंचांग के अनुसार इस वर्ष फाल्गुन अमावस्या 17 फरवरी 2026 को पड़ रही है, ऐसे में इस दिन किया गया तप, स्नान और दान अनेक गुणा पुण्य प्रदान करता है।
पीपल की पूजा से प्राप्त होती है देवों और पितरों की कृपा
हिंदू शास्त्रों में पीपल के वृक्ष को त्रिदेव का स्वरूप माना गया है। पितरों से भी इसका विशेष संबंध बताया गया है। फाल्गुन अमावस्या के दिन पीपल की जड़ में जल अर्पित करने और सरसों के तेल का दीया जलाने से देवी-देवताओं और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। कहा जाता है कि पीपल के नीचे दीया जलाने से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और जीवन की जटिलताओं में आश्चर्यजनक रूप से सुधार आता है।
पितृ दोष शांति के लिए श्रेष्ठ तिथि
जिन व्यक्तियों की कुंडली में पितृ दोष हो या जीवन में पितरों से संबंधित बाधाएं आ रही हों, उनके लिए फाल्गुन अमावस्या सबसे उपयुक्त दिन है। इस तिथि पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके श्रद्धा के साथ तर्पण करना और पितृसूक्त का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसा करने से पितरों की संतुष्टि होती है और वे परिवार पर अपना आशीर्वाद बरसाते हैं।
स्नान-दान से बढ़ता है पुण्य और कम होते हैं दोष
फाल्गुन अमावस्या पर तैत्तिरीय और पुराणों में स्नान और दान का विशेष विधान बताया गया है। जल तीर्थ पर स्नान करने के बाद जरूरतमंदों, ब्राह्मणों या पुजारियों को तिल, वस्त्र, अन्न, गुड़, घी, काला छाता, काले जूते, गौदान या धन का दान करने से जीवन की अनेक समस्याएं शांत होती हैं। मान्यता है कि दान करने से दुखों की निवृत्ति होती है और घर-परिवार में मंगल की स्थापना होती है।
धन-संपत्ति वृद्धि के लिए लक्ष्मी पूजा
अमावस्या तिथि धन की देवी की असीम कृपा प्राप्त करने के लिए बेहद शुभ मानी जाती है। फाल्गुन अमावस्या के दिन घर की साफ-सफाई कर माता लक्ष्मी की विशेष पूजा करनी चाहिए। उनके मंत्रों का जप करने और मुख्य द्वार पर दीया जलाने से धन संबंधी अड़चनें दूर होती हैं। ध्यान रहे कि घर का कोई भी कोना अंधेरा न रहे, क्योंकि प्रकाश को देवी लक्ष्मी की प्रसन्नता का कारण माना गया है।
फाल्गुन अमावस्या ऐसी तिथि है जो पितरों की प्रसन्नता, आर्थिक उन्नति और बाधाओं के शमन का द्वार खोलती है। श्रद्धा और शुद्ध भाव से किए गए उपाय मनोकामनाओं को पूर्ण करने में समर्थ होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाते हैं।
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