कोलकाता डेस्क: हिंदू धर्म में जितिया व्रत यानी जीवित्पुत्रिका व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से महिलाएं यह व्रत रखती हैं। हर साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर रखा जाने वाला यह व्रत इस बार तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस पैदा कर रहा है। सवाल है कि जितिया व्रत 3 अक्टूबर को रखा जाएगा या 4 अक्टूबर को?
3 अक्टूबर को रखा जाएगा जितिया व्रत
पंचांग के अनुसार, 2026 में जितिया व्रत 3 अक्टूबर, शनिवार को रखा जाएगा। वहीं, 4 अक्टूबर को व्रत का पारण किया जाएगा। दरअसल, इस बार अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर की सुबह शुरू होकर 4 अक्टूबर की सुबह तक रहेगी। इसी वजह से व्रत की तारीख को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
कब से कब तक रहेगी अष्टमी तिथि?
जितिया व्रत आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इस बार अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर की सुबह करीब 7:59 बजे शुरू होगी और 4 अक्टूबर की सुबह करीब 5:51 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर मुख्य व्रत 3 अक्टूबर को रखा जाएगा।
तीन दिनों तक चलती है जितिया की परंपरा
जितिया व्रत केवल एक दिन का पर्व नहीं है, बल्कि इससे जुड़ी धार्मिक परंपराएं तीन दिनों तक चलती हैं। इसकी शुरुआत 2 अक्टूबर को नहाय-खाय से होगी। इसके बाद 3 अक्टूबर को महिलाएं मुख्य जितिया व्रत रखेंगी। अगले दिन यानी 4 अक्टूबर को व्रत का पारण किया जाएगा।
नहाय-खाय के साथ होगी शुरुआत
जितिया व्रत से एक दिन पहले नहाय-खाय की परंपरा निभाई जाती है। इस दिन व्रती स्नान करने के बाद सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं। कई क्षेत्रों में नहाय-खाय के दिन कद्दू-भात खाने की भी परंपरा है। हालांकि, अलग-अलग इलाकों और परिवारों में इसके नियमों में कुछ अंतर देखने को मिलता है।
जितिया व्रत में रखा जाता है निर्जला उपवास
मुख्य व्रत के दिन महिलाएं संतान की लंबी उम्र और उनके सुखी जीवन की कामना के साथ उपवास रखती हैं। कई परंपराओं में जितिया का व्रत निर्जला रखा जाता है। यानी व्रत के दौरान अन्न और जल दोनों का त्याग किया जाता है। व्रत के नियमों का पालन संबंधित परिवार और क्षेत्र की धार्मिक परंपरा के अनुसार किया जाता है।
राजा जिमूतवाहन की होती है पूजा
जितिया व्रत में राजा जिमूतवाहन की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। व्रत रखने वाली महिलाएं विधि-विधान से पूजा करती हैं और इसके बाद जितिया व्रत की कथा सुनती हैं। धार्मिक मान्यताओं में जिमूतवाहन की कथा को त्याग, करुणा और परोपकार से जोड़कर देखा जाता है।
3 अक्टूबर को ये शुभ मुहूर्त
3 अक्टूबर को पूजा और धार्मिक कार्यों के लिए कई शुभ समय बताए गए हैं। दिल्ली के पंचांग के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:38 बजे से 5:26 बजे तक रहेगा। वहीं प्रातः संध्या का समय सुबह 5:02 बजे से 6:15 बजे तक बताया गया है।
इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक रहेगा। शाम में गोधूलि मुहूर्त 6:05 बजे से 6:29 बजे तक और सायाह्न संध्या का समय 6:05 बजे से 7:18 बजे तक बताया गया है। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय के अंतर के कारण मुहूर्त में थोड़ा बदलाव हो सकता है।
4 अक्टूबर को होगा पारण
जितिया व्रत रखने वाली महिलाएं अगले दिन यानी 4 अक्टूबर, रविवार को पारण करेंगी। दिल्ली के पंचांग के अनुसार पारण का समय सुबह 7:28 बजे के बाद बताया गया है। हालांकि, व्रत खोलने से पहले स्थानीय पंचांग में दिए गए पारण समय को देखना उचित माना जाता है।
जितिया व्रत का क्या है महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जितिया व्रत संतान की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य, सुरक्षा और सुख-समृद्धि की कामना के लिए किया जाता है। कई जगहों पर इसे विशेष रूप से माताओं द्वारा संतान के कल्याण के लिए रखा जाता है। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ क्षेत्रों में इस व्रत की विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा देखने को मिलती है।
जितिया व्रत 2026 की पूरी तारीख एक नजर में
- नहाय-खाय: 2 अक्टूबर 2026
- जितिया व्रत: 3 अक्टूबर 2026
- अष्टमी तिथि समाप्त: 4 अक्टूबर 2026, सुबह करीब 5:51 बजे
- व्रत का पारण: 4 अक्टूबर 2026
इस तरह 3 और 4 अक्टूबर को लेकर चल रहा कंफ्यूजन दूर हो जाता है। 2026 में जितिया व्रत 3 अक्टूबर को रखा जाएगा, जबकि 4 अक्टूबर को व्रत का पारण होगा।