कैंची धाम उत्तराखंड के नैनीताल जिले में भवाली–अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक स्थल है। यह नैनीताल से लगभग 17 से 18 किलोमीटर की दूरी पर दो पहाड़ियों के बीच एक ऐसी घाटी में बसा है, जिसका आकार कैंची जैसा प्रतीत होता है। इसी विशिष्ट भौगोलिक संरचना के कारण इसका नाम कैंची धाम पड़ा। चारों ओर फैली हरियाली, शांत वातावरण और हिमालय की पवित्र ऊर्जा इस स्थान को ध्यान और साधना के लिए अत्यंत उपयुक्त बनाती है।
नीम करौली बाबा का आध्यात्मिक जीवन
नीम करौली बाबा, जिनका वास्तविक नाम लक्ष्मीनारायण शर्मा माना जाता है, 20वीं शताब्दी के महान संतों में से एक थे। वे हनुमान जी के परम भक्त थे और उनका संपूर्ण जीवन प्रेम, करुणा और निःस्वार्थ सेवा को समर्पित रहा। बाबा ने कभी स्वयं का प्रचार नहीं किया, फिर भी उनकी महिमा स्वतः ही लोगों तक पहुंचती चली गई। उनका संदेश अत्यंत सरल था—भगवान का स्मरण, सच्ची भावना और सेवा ही जीवन का सार है।
आश्रम की स्थापना और मंदिर परिसर
कैंची धाम आश्रम की स्थापना वर्ष 1964 में हुई थी। आश्रम का मुख्य मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है, जिनके प्रति नीम करौली बाबा की गहरी भक्ति थी। इसके साथ ही परिसर में राम-सीता और शिव-पार्वती सहित अन्य देवी-देवताओं के मंदिर भी स्थित हैं। आश्रम की बनावट भले ही साधारण हो, लेकिन यहां का वातावरण अत्यंत शांत और ऊर्जा से भरपूर अनुभव कराया करता है।
वैश्विक स्तर पर बाबा की प्रेरणा
नीम करौली बाबा की शिक्षाएं भारत तक सीमित नहीं रहीं। एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स, फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग और हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया रॉबर्ट्स जैसे कई अंतरराष्ट्रीय व्यक्तित्व बाबा से प्रेरित माने जाते हैं। कहा जाता है कि स्टीव जॉब्स के जीवन दर्शन और रचनात्मक दृष्टिकोण पर बाबा की शिक्षाओं का गहरा प्रभाव था। यह तथ्य कैंची धाम को वैश्विक आध्यात्मिक मानचित्र पर एक विशेष पहचान देता है।
स्थापना दिवस और भंडारे की परंपरा
कैंची धाम में हर वर्ष 15 जून को स्थापना दिवस के अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है। इस दिन देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा के दर्शन और प्रसाद के लिए यहां पहुंचते हैं। यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सेवा, अनुशासन और सामूहिक समर्पण की भावना का जीवंत उदाहरण होता है।
चमत्कार नहीं, आत्मिक परिवर्तन का संदेश
नीम करौली बाबा की शिक्षाओं का मूल आधार चमत्कारों से अधिक आत्मिक परिवर्तन पर केंद्रित है। बाबा का मानना था कि यदि मन शुद्ध हो और भाव सच्चा हो, तो ईश्वर स्वयं मार्गदर्शन करते हैं। उनके भक्त आज भी यह विश्वास करते हैं कि बाबा अदृश्य रूप में संकट के समय सहायता और मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
आज का कैंची धाम
आज कैंची धाम केवल एक धार्मिक तीर्थ नहीं, बल्कि आत्मिक जागरण का केंद्र बन चुका है। यहां आने वाला प्रत्येक व्यक्ति, चाहे कुछ समय के लिए ही क्यों न हो, जीवन की आपाधापी से दूर होकर स्वयं से जुड़ने का अनुभव करता है। हिमालय की गोद में बसा यह धाम नीम करौली बाबा की करुणा, प्रेम और कृपा का सजीव प्रतीक है, जो श्रद्धालुओं को भीतर से समृद्ध करता है।
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