सनातन धर्म में चतुर्थी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। यह तिथि विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य भगवान गणेश को समर्पित होती है। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर प्रद्युम्न चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन श्रद्धालु भगवान गणेश का व्रत रखते हैं और विधि-विधान से उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रद्युम्न चतुर्थी का व्रत करने और भगवान गणेश की उपासना करने से जीवन में सुख-समृद्धि, सफलता और खुशहाली का आगमन होता है। साथ ही सभी प्रकार के विघ्न और बाधाएं दूर होती हैं।
प्रद्युम्न चतुर्थी पर बन रहे हैं दो शुभ योग
इस वर्ष प्रद्युम्न चतुर्थी के अवसर पर दो अत्यंत शुभ योगों का संयोग बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग और गुरु पुष्य योग के कारण इस दिन का महत्व और बढ़ गया है। गुरु पुष्य योग सुबह 5:45 बजे से प्रारंभ होकर 11:32 बजे तक रहेगा। वहीं सर्वार्थ सिद्धि योग भी इसी समय तक प्रभावी रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन शुभ योगों में पूजा-पाठ, दान-पुण्य और मांगलिक कार्य करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
प्रद्युम्न चतुर्थी पूजा का शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त
सुबह 04:03 बजे से 04:43 बजे तक
मध्याह्न पूजा मुहूर्त
सुबह 10:58 बजे से दोपहर 01:46 बजे तक
विजय मुहूर्त
दोपहर 02:42 बजे से 03:38 बजे तक
इन शुभ मुहूर्तों में भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करना विशेष फलदायी माना गया है।
ऐसे करें प्रद्युम्न चतुर्थी की पूजा
- प्रद्युम्न चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के पूजा स्थल की साफ-सफाई करें।
- शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। गणपति बप्पा को लाल या पीले रंग के पुष्प अर्पित करें। इसके साथ ही दूर्वा, सिंदूर और अक्षत चढ़ाएं तथा मोदक या लड्डुओं का भोग लगाएं।
- इसके बाद गणेश मंत्रों का जाप करें और गणेश चालीसा का पाठ करें। पूजा के दौरान भगवान गणेश से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और मंगल की कामना करें। व्रत रखने वाले श्रद्धालु दिनभर उपवास करें और शाम को पुनः आरती कर प्रसाद वितरित करें।
चंद्र दर्शन से करें परहेज
धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रद्युम्न चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन करना वर्जित माना गया है। मान्यता है कि इस दिन चंद्र दर्शन करने से व्यक्ति को झूठे आरोप या अपयश का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए श्रद्धालुओं को इस दिन चंद्रमा देखने से बचने की सलाह दी जाती है।
भगवान गणेश की कृपा से दूर होते हैं सभी विघ्न
मान्यता है कि प्रद्युम्न चतुर्थी पर श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और व्यक्ति को सुख, समृद्धि तथा सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।