नई दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बीच मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम का भारतीय संस्कृति और हिंदी भाषा के प्रति लगाव देखने को मिला। दिल्ली में अपने व्यस्त कार्यक्रम से कुछ समय निकालकर उन्होंने भारतीय पियानो वादक के साथ हिंदी का लोकप्रिय गीत गाया। अनवर इब्राहिम ने फिल्म ‘तीन देवियां’ के मशहूर गीत ‘ख्वाब हो तुम या कोई हकीकत’ को गुनगुनाया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया गया।
किशोर कुमार की आवाज का आज भी जादू
‘ख्वाब हो तुम या कोई हकीकत’ वर्ष 1965 में आई फिल्म ‘तीन देवियां’ का लोकप्रिय गीत है। इसे महान गायक किशोर कुमार ने अपनी आवाज दी थी, जबकि गीत के बोल मशहूर गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे थे। दशकों बीत जाने के बावजूद यह गीत हिंदी सिनेमा के यादगार गीतों में शामिल है। अनवर इब्राहिम द्वारा इसे गुनगुनाया जाना भारतीय संगीत और सिनेमा की अंतरराष्ट्रीय पहुंच को भी दर्शाता है।
हिंदी दिवस से पहले सामने आया खास संदेश
14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है और उससे ठीक पहले मलेशियाई प्रधानमंत्री का लोकप्रिय हिंदी गीत गाना खास तौर पर चर्चा में है। भारत से बाहर के किसी शीर्ष राजनीतिक नेता का इस तरह हिंदी गीत के माध्यम से भारतीय संस्कृति से जुड़ना प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अनवर इब्राहिम की इस पहल को हिंदी भाषा, भारतीय संगीत और सांस्कृतिक विरासत के प्रति उनके सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।
भारतीय पियानो वादक के साथ गाया गीत
अनवर इब्राहिम ने यह गीत अकेले नहीं, बल्कि एक भारतीय पियानो वादक के साथ मिलकर गाया। संगीत के जरिए दोनों की यह प्रस्तुति दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन के औपचारिक कार्यक्रमों से अलग एक अनौपचारिक और सांस्कृतिक क्षण बन गई। वीडियो सामने आने के बाद लोगों के बीच इसकी चर्चा शुरू हो गई और भारत-मलेशिया के संबंधों के सांस्कृतिक पक्ष को भी इससे जोड़कर देखा जा रहा है।
मजरूह सुल्तानपुरी के गीत फिर चर्चा में
मजरूह सुल्तानपुरी के लिखे गीत का इस तरह चर्चा में आना पहली बार नहीं है। इससे पहले अगस्त में भी उनके लिखे एक शेर ने लोगों का ध्यान खींचा था। कोलकाता में विमान के उतरने से पहले इंडिगो के एक पायलट ने मजरूह सुल्तानपुरी का शेर सुनाया था। विमान में मौजूद यात्रियों ने इसे पसंद किया और यह प्रसंग सोशल मीडिया पर भी चर्चा में रहा।
हिंदी सिनेमा की सीमाओं से परे पहुंच
मजरूह सुल्तानपुरी की रचनाओं और किशोर कुमार की आवाज से सजा यह गीत आज भी लोगों के बीच अपनी जगह बनाए हुए है। अनवर इब्राहिम का इसे गाना बताता है कि हिंदी सिनेमा का संगीत केवल भारत तक सीमित नहीं रहा है। लोकप्रिय हिंदी गीतों ने अलग-अलग देशों और संस्कृतियों के लोगों के बीच भी अपनी पहचान बनाई है, जो भारतीय सांस्कृतिक प्रभाव की एक महत्वपूर्ण मिसाल है।
ब्रिक्स सम्मेलन के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव की तस्वीर
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन जहां आर्थिक और वैश्विक मुद्दों पर देशों को एक मंच पर ला रहा है, वहीं अनवर इब्राहिम का हिंदी गीत गाना इसकी एक अलग सांस्कृतिक तस्वीर पेश करता है। भारत और मलेशिया के बीच लंबे समय से सांस्कृतिक और लोगों के बीच संपर्क के संबंध रहे हैं। ऐसे में दिल्ली में हिंदी गीत के जरिए मलेशियाई प्रधानमंत्री की यह प्रस्तुति दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव की सहज और यादगार झलक बन गई है।