उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में 308 पहियों वाला विशालकाय ट्रक आखिरकार करीब 45 घंटे की मशक्कत के बाद डाफी टोल प्लाजा से बाहर निकल गया। यह मेगा ट्रक 200 टन से अधिक वजनी भारी औद्योगिक मशीन लेकर ओडिशा के पारादीप बंदरगाह से उत्तर प्रदेश की ओर जा रहा था। सोमवार को डाफी टोल प्लाजा पहुंचने के बाद भारी वजन के चलते ट्रेलर को आगे निकालना मुश्किल हो गया था। वैकल्पिक रास्ते पर ट्रक के पहिए जमीन में धंस गए थे, जिसके बाद मौके पर राहत और बचाव जैसा अभियान चलाना पड़ा। ट्रक को निकालने के लिए सड़क पर गिट्टी और बालू डाली गई, जबकि कई जगह लोहे की प्लेटें भी बिछाई गईं। करीब चार घंटे की लगातार मशक्कत के बाद बुधवार दोपहर करीब 12 बजे इसे हाईवे पर लाया जा सका। इसके बाद ट्रक को आगे बढ़ाने के लिए यातायात और सड़क व्यवस्था का भी विशेष ध्यान रखा गया। डाफी की मुश्किल राह पार करना इस लंबे सफर का एक बड़ा पड़ाव माना जा रहा है।
रिंग रोड से गाजीपुर की तरफ बढ़ा महाबली
डाफी टोल प्लाजा से निकलने के बाद 308 पहियों वाला यह विशाल ट्रेलर वाराणसी रिंग रोड की ओर बढ़ गया। ट्रक मोहनसराय और राजातालाब होते हुए रिंग रोड तक पहुंचा और फिर गाजीपुर की दिशा में आगे बढ़ा। बुधवार शाम तक इसके रखौना-हरहुआ रिंग रोड से होकर गाजीपुर की तरफ जाने की जानकारी सामने आई। इतने बड़े ट्रेलर को सड़क पर आगे बढ़ाने के दौरान कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। रास्ते में बिजली के तार, होर्डिंग, सड़क की चौड़ाई और अन्य ढांचागत बाधाएं बड़ी परेशानी बन रही हैं। जरूरत पड़ने पर रास्ते में मौजूद कुछ अवरोधों को हटाकर या व्यवस्था बदलकर ट्रक को आगे निकाला जा रहा है। भारी वजन और विशाल आकार के कारण ट्रक की गति भी सामान्य वाहनों की तुलना में काफी कम है। अब वाराणसी के बाद इस महाट्रक की अगली बड़ी चुनौती गाजीपुर की राह को पार करना है।
आगे भी आसान नहीं है 308 पहियों वाले ट्रक का सफर
वाराणसी की मुश्किल राह पार करने के बावजूद इस विशाल ट्रक का सफर अभी खत्म नहीं हुआ है। इसके आगे गाजीपुर और फिर आजमगढ़ की ओर का रास्ता है, जहां कई जगह सड़क की स्थिति और यातायात चुनौती बन सकते हैं। ट्रक को आखिरकार लखीमपुर खीरी के कुंभी स्थित बलरामपुर चीनी मिल के प्लांट तक पहुंचना है। इतनी भारी मशीन को लेकर चल रहे ट्रेलर को मोड़ने और संकरी सड़कों से निकालने में विशेष सावधानी बरती जा रही है। कई स्थानों पर बिजली की लाइन, पेड़, होर्डिंग और अन्य बाधाओं को देखते हुए रास्ते की व्यवस्था करनी पड़ रही है। ट्रक की धीमी रफ्तार के कारण एक दिन में सामान्य वाहनों की तुलना में बेहद कम दूरी तय हो पा रही है। इसी वजह से इस पूरे सफर को पूरा होने में काफी समय लग रहा है। आगे भी प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के सामने इस मेगा ट्रक को सुरक्षित तरीके से आगे निकालने की चुनौती बनी रहेगी।
बेल्जियम की मशीन लेकर निकला है महाट्रक
308 पहियों वाला यह विशाल ट्रेलर अपने साथ बेल्जियम से आई एक भारी औद्योगिक मशीन लेकर चल रहा है। यह मशीन ओडिशा के पारादीप बंदरगाह के रास्ते भारत पहुंची और इसके बाद इसे सड़क मार्ग से उत्तर प्रदेश ले जाया जा रहा है। मशीन को लखीमपुर खीरी के कुंभी स्थित बलरामपुर चीनी मिल के प्लांट तक पहुंचाया जाना है। इतने बड़े आकार और वजन के कारण इसे ले जाने के लिए विशेष क्षमता वाले मल्टी-एक्सल ट्रेलर का इस्तेमाल किया गया है। ट्रेलर में 308 पहिए होने के कारण इसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी चर्चा में हैं। सफर के दौरान कई जगह सड़क और बुनियादी ढांचे के हिसाब से विशेष तैयारी करनी पड़ रही है। रास्ते में आने वाली चुनौतियों के कारण ट्रक की औसत रफ्तार करीब 10 से 20 किलोमीटर प्रतिदिन बताई जा रही है। इसी धीमी गति के चलते पारादीप से लखीमपुर खीरी तक का यह सफर काफी लंबा हो गया है।
मंजिल तक पहुंचने में अभी लगेगा वक्त
वाराणसी की बड़ी बाधा पार करने के बाद अब इस विशाल ट्रक की नजर आगे की मंजिल पर है। डाफी टोल प्लाजा पर करीब 45 घंटे तक फंसे रहने के बाद आखिरकार इसे आगे बढ़ने का रास्ता मिला है। अब ट्रक को गाजीपुर और आजमगढ़ समेत कई इलाकों से होकर गुजरना है। हर पड़ाव पर सड़क की चौड़ाई, मोड़, बिजली की लाइन और अन्य बाधाओं को ध्यान में रखकर आगे की रणनीति बनानी होगी। भारी मशीन के कारण ट्रक की रफ्तार सामान्य वाहनों की तरह तेज नहीं हो सकती। रास्ते में जरूरत के अनुसार सड़क पर अतिरिक्त व्यवस्था करने और अवरोध हटाने का काम भी किया जा रहा है। इसके बाद यह ट्रेलर लखीमपुर खीरी के कुंभी स्थित बलरामपुर चीनी मिल के प्लांट तक पहुंचेगा। फिलहाल वाराणसी पार करने के बाद 308 पहियों वाले इस ‘राक्षस ट्रक’ के अगले पड़ाव पर सभी की नजर बनी हुई है।