नई दिल्ली- लोकसभा की कार्यवाही के दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख और कन्नौज सांसद अखिलेश यादव स्पीकर ओम बिरला के एक फैसले पर नाराज हो गए। दरअसल, स्पीकर ने कहा कि सरकार और विपक्ष के बीच चर्चा को लेकर सहमति बन गई है और सरकार बहस के लिए तैयार है। इस दौरान बोलने का मौका कांग्रेस और सरकार के प्रतिनिधियों को दिए जाने पर अखिलेश यादव ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि केवल कांग्रेस और सरकार के बीच बातचीत कर बाकी विपक्षी दलों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस घटनाक्रम के बाद सदन में विपक्षी एकजुटता और राजनीतिक समन्वय को लेकर भी सवाल उठने लगे।
स्पीकर के फैसले पर जताई नाराजगी
अखिलेश यादव ने स्पीकर से कहा कि आपने कांग्रेस और सरकार दोनों को बुलाकर क्या आपस में समझौता कर लिया है। उनका कहना था कि विपक्ष के अन्य दलों को भी अपनी बात रखने का समान अवसर मिलना चाहिए। इस पर स्पीकर ओम बिरला ने जवाब देते हुए कहा कि वह सदन की कार्यवाही चला रहे हैं और विपक्षी दलों के आपसी मतभेदों का समाधान करना उनकी जिम्मेदारी नहीं है।
BJP के साथ कांग्रेस पर भी साधा निशाना
लोकसभा में दिए गए बयान से साफ संकेत मिले कि अखिलेश यादव केवल भाजपा ही नहीं, बल्कि कांग्रेस की भूमिका पर भी सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से आरोप लगाया कि विपक्ष के मुद्दों पर बातचीत में सभी दलों को साथ लेकर चलने के बजाय कुछ दलों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसे विपक्षी गठबंधन के भीतर बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के रूप में भी देखा जा रहा है।
विपक्षी एकजुटता पर उठे सवाल
हाल के दिनों में विपक्ष सरकार के खिलाफ कई मुद्दों पर संयुक्त प्रदर्शन करता रहा है। 21 जुलाई को प्रधानमंत्री आवास के बाहर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अखिलेश यादव ने संयुक्त धरना दिया था, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया था। हालांकि, लोकसभा में हुई इस घटना के बाद विपक्षी दलों के बीच समन्वय और नेतृत्व को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
श्रेय की राजनीति पर तेज हुई बहस
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए विपक्षी दल अपने-अपने जनाधार को मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में संसद के भीतर और बाहर आंदोलनों का राजनीतिक श्रेय लेने की प्रतिस्पर्धा भी बढ़ती दिखाई दे रही है। आम आदमी पार्टी सहित अन्य दल पहले भी विपक्षी रणनीति को लेकर सवाल उठा चुके हैं।