लखनऊ: NEET पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उत्तरप्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इस फैसले को सरकार की मजबूरी बताते हुए इसे देश के युवाओं और छात्रों के संघर्ष की जीत करार दिया है। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अपना दल (कमेरावादी) के नेताओं ने सरकार पर निशाना साधते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को युवाओं की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि नई पीढ़ी अपने अधिकारों के लिए जागरूक है और अन्याय के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाना जानती है। उन्होंने कहा कि आज के युवा रात में भी जागकर अपने भविष्य की लड़ाई लड़ रहे हैं, इसलिए प्रधानमंत्री को भी रात में संबोधन देना पड़ा। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि युवाओं के बढ़ते दबाव को देखकर सरकार को आखिरकार यह फैसला लेना पड़ा, हालांकि यह कदम काफी पहले उठा लिया जाना चाहिए था।
पल्लवी पटेल बोलीं- युवाओं ने सरकार को झुकने पर मजबूर किया
अपना दल (कमेरावादी) की विधायक पल्लवी पटेल ने कहा कि जो काम कोई राजनीतिक दल नहीं कर पाया, वह देश के युवाओं ने कर दिखाया। जिन लोगों ने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया, उन्हें आखिरकार इस्तीफा देने पर मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह सरकार के लिए एक बड़ा संदेश और चेतावनी है कि युवाओं की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अजय राय बोले- यह लाखों छात्रों के संघर्ष की जीत
उत्तरप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि यह देशभर के लाखों मेहनती छात्रों की जीत है, जिन्होंने अपने भविष्य की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और पुलिसिया कार्रवाई के जरिए छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश की, लेकिन आखिरकार उसे युवाओं की जिद और संघर्ष के आगे झुकना पड़ा।
अजय राय ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी का हर कार्यकर्ता छात्रों के साथ खड़ा था और आगे भी उनके अधिकारों की लड़ाई में साथ रहेगा। उन्होंने मांग की कि NEET पेपर लीक मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए तथा छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले हर दोषी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इस्तीफे के बाद तेज हुई राजनीतिक बहस
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्ष सरकार को लगातार घेर रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि यह फैसला छात्रों के लगातार विरोध, जनदबाव और राजनीतिक दबाव का परिणाम है। वहीं, सत्तापक्ष की ओर से अभी तक इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में NEET पेपर लीक मामला संसद से लेकर सड़कों तक राजनीतिक बहस का प्रमुख मुद्दा बना रह सकता है।