उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने अपनी तैयारियों को गति देना शुरू कर दिया है। पार्टी एक बार फिर बूथ स्तर के प्रबंधन को चुनावी रणनीति का प्रमुख आधार बनाने की तैयारी में है। कार्यकर्ताओं के जरिए अधिक से अधिक मतदाताओं से संपर्क, स्थानीय मुद्दों की पहचान और संगठन का संदेश हर बूथ तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। बीजेपी का लक्ष्य जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत कर आगामी चुनाव में पिछले प्रदर्शन की कमियों को दूर करना है।
18,900 बूथ बने पार्टी की रणनीति का केंद्र
बीजेपी ने 18,900 ऐसे बूथों को चिन्हित किया है, जहां 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को बढ़त या जीत हासिल हुई थी, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में इन बूथों पर उसे हार का सामना करना पड़ा। पार्टी अब इन क्षेत्रों में दोबारा अपना आधार मजबूत करने की रणनीति बना रही है। इन बूथों पर संगठन की स्थिति, मतदाताओं के रुझान और पिछले चुनाव में हुए बदलावों का आकलन किया जाएगा, ताकि कमजोर हुई पकड़ को फिर से मजबूत किया जा सके।
16 से 22 सितंबर तक यूपी दौरे पर रहेंगे विनोद तावड़े
इसी रणनीति के तहत बीजेपी के उत्तर प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े 16 सितंबर से 22 सितंबर तक राज्य के दौरे पर रहेंगे। उनके दौरे के दौरान उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिए जाने की उम्मीद है, जहां पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा था। बूथ स्तर के संगठन और कार्यकर्ताओं की सक्रियता की समीक्षा के साथ-साथ उन कारणों पर भी चर्चा होगी, जिनकी वजह से बीजेपी के पक्ष में रहा मतदाता आधार कमजोर हुआ।
2024 के लोकसभा चुनाव में लगा था बड़ा झटका
2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में बीजेपी का प्रदर्शन 2019 की तुलना में काफी कमजोर रहा था। पार्टी 2019 में राज्य की 62 लोकसभा सीटें जीतने में सफल रही थी, लेकिन 2024 में उसका आंकड़ा घटकर 33 सीटों पर रह गया। इसके विपरीत समाजवादी पार्टी ने अपने प्रदर्शन में बड़ा सुधार किया और 2019 की 5 सीटों के मुकाबले 2024 में 37 सीटों पर जीत दर्ज की। इन नतीजों ने बीजेपी के सामने राज्य में अपने सामाजिक और संगठनात्मक आधार को फिर से मजबूत करने की चुनौती खड़ी कर दी।
ग्रामीण इलाकों में सबसे ज्यादा नुकसान
बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चिंता ग्रामीण क्षेत्रों में सामने आए चुनावी रुझान रहे। पार्टी के आकलन के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में करीब 80 फीसदी बूथों पर उसकी पिछली बढ़त खत्म हो गई। अवध और पूर्वांचल के क्षेत्रों में नुकसान अपेक्षाकृत अधिक दिखाई दिया। यही वजह है कि अब पार्टी की रणनीति में ग्रामीण बूथों और उन इलाकों को विशेष महत्व दिया जा रहा है, जहां मतदाताओं के रुझान में बड़ा बदलाव देखने को मिला था।
अवध में 2022 की मजबूत स्थिति को वापस पाने की चुनौती
2022 के विधानसभा चुनाव में अवध क्षेत्र बीजेपी के लिए मजबूत इलाका रहा था। क्षेत्र की 154 विधानसभा सीटों में पार्टी ने 101 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसके बावजूद बाद के लोकसभा चुनाव में अयोध्या, फैजाबाद, सुल्तानपुर और सीतापुर जैसे क्षेत्रों में बीजेपी को अपेक्षाकृत बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। अब पार्टी के सामने चुनौती यह है कि विधानसभा चुनाव से पहले इन क्षेत्रों में संगठनात्मक नेटवर्क को फिर सक्रिय किया जाए और 2022 के समर्थन आधार को दोबारा मजबूत बनाया जाए।
पूर्वांचल में बदले सामाजिक समीकरणों पर नजर
पूर्वांचल में भी बीजेपी के सामने चुनौती कम नहीं है। 2022 में क्षेत्र की 102 विधानसभा सीटों में से बीजेपी ने 53 सीटों पर जीत हासिल की थी। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में कई इलाकों में मतदाताओं के रुझान में बदलाव दिखाई दिया। पार्टी के आकलन के अनुसार गैर-ओबीसी मतों के एक हिस्से का झुकाव समाजवादी पार्टी की ओर हुआ, जिसका असर जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली और प्रयागराज जैसे क्षेत्रों में भी देखने को मिला। ऐसे में बीजेपी अब बूथ स्तर पर सामाजिक समीकरणों और मतदाता संपर्क दोनों को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
2027 से पहले संगठन की अग्निपरीक्षा
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बूथ स्तर की मजबूती को चुनावी सफलता का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। ऐसे में 18,900 बूथ बीजेपी के लिए केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि 2024 के झटके से वापसी का बड़ा लक्ष्य बन गए हैं। पार्टी अब यह समझने की कोशिश करेगी कि जिन बूथों पर 2022 में समर्थन मिला था, वहां 2024 में मतदाताओं का रुख क्यों बदला। यदि बीजेपी इन बूथों पर दोबारा बढ़त हासिल करने में सफल रहती है, तो आगामी विधानसभा चुनाव में उसके प्रदर्शन पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।