लखनऊ- बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी अध्यक्ष मायावती ने राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार के साथ लगातार दो दिनों तक संगठन और चुनावी रणनीति को लेकर मंथन किया। बैठक में संगठन को मजबूत करने, चुनावी तैयारियों को धार देने और आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई। माना जा रहा है कि बसपा अब चुनावी मोड में पूरी तरह सक्रिय हो गई है।
संगठन को मजबूत करने पर फोकस
सूत्रों के मुताबिक बैठक में बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने और चुनावी रणनीति को जिलों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया। बताया जा रहा है कि मायावती अगले सप्ताह उत्तर प्रदेश के पार्टी पदाधिकारियों और जिलाध्यक्षों की बड़ी बैठक बुला सकती हैं, जिसमें चुनावी अभियान की विस्तृत रणनीति पर अंतिम रूप दिया जाएगा।
आकाश आनंद की बढ़ेगी चुनावी सक्रियता
सूत्रों के अनुसार आकाश आनंद का राजस्थान दौरा स्थगित कर उन्हें विशेष रूप से लखनऊ बुलाया गया था। मायावती से मुलाकात के दौरान उनके आगामी चुनावी कार्यक्रमों पर चर्चा हुई। पार्टी सितंबर से आकाश आनंद के प्रदेशव्यापी दौरे शुरू करने की तैयारी कर रही है। कार्यकर्ता सम्मेलनों और जनसभाओं के जरिए उन्हें अधिक सक्रिय भूमिका में उतारने की योजना बनाई जा रही है।
कार्यकर्ता सम्मेलनों का सिलसिला जारी
प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल के नेतृत्व में प्रदेशभर में कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की भागीदारी देखने को मिल रही है। पार्टी के भीतर आकाश आनंद को इन सम्मेलनों में शामिल करने की मांग भी लगातार बढ़ रही है, ताकि संगठन में नई ऊर्जा का संचार किया जा सके।
9 अक्टूबर की महारैली पर नजर
बसपा 9 अक्टूबर को लखनऊ में पार्टी संस्थापक कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस पर विशाल रैली आयोजित करने की तैयारी में है। पिछले वर्ष आयोजित रैली में बड़ी संख्या में समर्थकों के शामिल होने का दावा किया गया था। इस बार भी मायावती के रैली को संबोधित करने की संभावना है। माना जा रहा है कि इस मंच से आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी का बड़ा राजनीतिक संदेश और रणनीति सामने आ सकती है।
प्रत्याशी चयन भी होगा तेज
पार्टी नेतृत्व ने उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया में भी तेजी लाने के संकेत दिए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बसपा यदि समय रहते उम्मीदवारों की घोषणा करती है तो इससे अन्य राजनीतिक दलों पर भी दबाव बढ़ सकता है और चुनावी समीकरणों में हलचल तेज हो सकती है।