अयोध्या - अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की गणना के दौरान सामने आए कथित चोरी के मामले के बाद भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपनी व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। अब मंदिर के चढ़ावे की गिनती किसी निजी एजेंसी के कर्मचारियों से नहीं कराई जाएगी, बल्कि बैंक अपने नियमित कर्मचारियों को इस कार्य के लिए नियुक्त करेगा।
सूत्रों के अनुसार, पहले से नियुक्त वाराणसी की सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज कंपनी के साथ अनुबंध का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। कंपनी के साथ बैंक का तीन वर्ष का करार इसी वर्ष समाप्त हो रहा है और इसे आगे बढ़ाने का निर्णय नहीं लिया गया है।
मुख्यालय से जारी हुए निर्देश
जानकारी के मुताबिक, लखनऊ स्थित SBI मुख्यालय से इस संबंध में आवश्यक निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। हालांकि बैंक के स्थानीय अधिकारी इस विषय पर सार्वजनिक रूप से कुछ भी कहने से बच रहे हैं। बैंक का मानना है कि चढ़ावे की गणना जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में अब सीधे बैंक के प्रशिक्षित कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करना अधिक सुरक्षित और पारदर्शी होगा।
SIT जांच में सामने आई थीं गंभीर अनियमितताएं
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ था। जांच के आधार पर कुल आठ लोगों को जेल भेजा गया, जिनमें छह गणना कर्मी शामिल थे। ये सभी कर्मचारी उस निजी एजेंसी के माध्यम से नियुक्त किए गए थे, जिसे बैंक ने अधिकृत किया था। हालांकि जांच में यह भी सामने आया कि एजेंसी के चयन की अनुशंसा ट्रस्टियों द्वारा बैंक अधिकारियों के माध्यम से की गई थी।
SOP का पालन नहीं होने पर उठे सवाल
SIT ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और SBI के बीच चढ़ावे की गणना को लेकर समझौता ज्ञापन (MoU) और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तय की गई थी, लेकिन किसी भी स्तर पर उसका प्रभावी पालन नहीं कराया गया। जांच में यह भी सामने आया कि जिस एजेंसी को यह जिम्मेदारी दी गई, वह मूल रूप से हाउसकीपिंग और मैनपावर उपलब्ध कराने का काम करती थी। उसे चढ़ावे की गणना का कोई पूर्व अनुभव नहीं था। इसके अलावा एजेंसी ने बिना पर्याप्त प्रशिक्षण के कर्मचारियों की नियुक्ति की।
सुरक्षा व्यवस्था में भी मिलीं बड़ी खामियां
SIT की रिपोर्ट के अनुसार गणना स्थल पर प्रवेश और निकास के समय कर्मचारियों की समुचित जांच नहीं की जाती थी। निगरानी और सुरक्षा के कई महत्वपूर्ण मानकों का पालन नहीं हुआ, जिससे चढ़ावे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए। इन अनियमितताओं के सामने आने के बाद ट्रस्ट और बैंक दोनों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। हालांकि हाल ही में हुई ट्रस्ट की बैठक में ट्रस्टियों ने बैंक पर अपनी जिम्मेदारियों का सही ढंग से निर्वहन नहीं करने का आरोप लगाया।
अब बैंक के कर्मचारी संभालेंगे पूरी प्रक्रिया
विवाद बढ़ने के बाद SBI ने फैसला किया है कि भविष्य में चढ़ावे की पूरी गणना बैंक के अपने कर्मचारियों की निगरानी और जिम्मेदारी में कराई जाएगी। इससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि अयोध्या शाखा के प्रबंधक अनूप त्रिपाठी ने इस संबंध में जानकारी होने से इनकार किया, जबकि क्षेत्रीय प्रबंधक मुरली मनोहर ने इस विषय पर कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया।
एजेंसी ने कहा- अंतिम फैसला बैंक का
वहीं सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज के मालिक गौरव सिंह ने कहा कि उन्हें अभी तक अनुबंध समाप्त करने की आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि आगे क्या होगा, इसका निर्णय पूरी तरह बैंक को करना है और बैंक के फैसले के अनुसार ही कार्रवाई की जाएगी। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के बाद SBI का यह फैसला मंदिर की चढ़ावा गणना व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
