उत्तरप्रदेश में पंचायत व्यवस्था को लेकर योगी सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसला लिया है। ग्राम प्रधानों और जिला पंचायत अध्यक्षों के बाद अब पहली बार राज्य के सभी 826 ब्लॉक प्रमुखों को प्रशासक नियुक्त किया गया है। सरकार ने रविवार को इस संबंध में आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि मौजूदा ब्लॉक प्रमुख पंचायत चुनाव होने तक प्रशासक के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाएंगे।

यह फैसला उत्तरप्रदेश के पंचायत प्रशासन के इतिहास में पहली बार लिया गया है। सामान्य परिस्थितियों में ब्लॉक प्रमुख का कार्यकाल समाप्त होने के बाद संबंधित खंड विकास अधिकारी (BDO) को प्रशासक नियुक्त किया जाता है, लेकिन इस बार सरकार ने मौजूदा जनप्रतिनिधियों को ही यह जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय लिया है।
कार्यकाल समाप्त होने से पहले जारी हुआ आदेश
प्रदेश के सभी ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल 19 जुलाई को समाप्त हो रहा था। इससे पहले ही सरकार ने उन्हें प्रशासक नियुक्त करने का आदेश जारी कर दिया। इस फैसले के बाद अब वे पंचायत चुनाव होने तक अपने पद पर बने रहेंगे और नियमित प्रशासनिक कार्यों का संचालन करेंगे।सरकार का मानना है कि इससे विकास कार्यों की निरंतरता बनी रहेगी और पंचायत चुनाव होने तक प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित नहीं होगी।
बड़े नीतिगत फैसलों की नहीं होगी अनुमति
सरकार ने प्रशासक बनाए गए ब्लॉक प्रमुखों के अधिकारों को लेकर कुछ स्पष्ट सीमाएं भी तय की हैं। प्रशासक के रूप में वे किसी भी बड़े नीतिगत, वित्तीय या दीर्घकालिक प्रभाव वाले निर्णय नहीं ले सकेंगे।
यदि किसी महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर निर्णय लेना होगा, तो उसे संबंधित जिलाधिकारी (DM) के माध्यम से राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा। अंतिम स्वीकृति शासन स्तर पर ही दी जाएगी। सरकार जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगी, जिसमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि प्रशासक किन कार्यों को स्वतंत्र रूप से कर सकेंगे और किन मामलों में अनुमति आवश्यक होगी।
पहले ग्राम प्रधान और जिला पंचायत अध्यक्ष भी बने थे प्रशासक
ब्लॉक प्रमुखों से पहले राज्य सरकार 11 जुलाई को सभी 75 जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक नियुक्त कर चुकी है। इसके अलावा 25 मई को प्रदेश के 57 हजार से अधिक ग्राम प्रधानों को भी प्रशासक बनाए जाने का आदेश जारी किया गया था।हालांकि, ग्राम प्रधानों की प्रशासक के रूप में नियुक्ति का मामला फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित है और इस पर न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
सरकार के इस निर्णय के पीछे प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों कारण माने जा रहे हैं। पंचायत चुनाव में संभावित देरी को देखते हुए स्थानीय निकायों में प्रशासनिक कार्य बाधित न हों, इसलिए मौजूदा ब्लॉक प्रमुखों को प्रशासक बनाया गया है।
साथ ही, इससे पहले ग्राम प्रधानों और जिला पंचायत अध्यक्षों को भी प्रशासक बनाए जाने के बाद पंचायत व्यवस्था में एकरूपता बनाए रखने के लिए ब्लॉक प्रमुखों को भी समान जिम्मेदारी दी गई है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले से स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों की भूमिका बनी रहेगी और विकास कार्यों की गति प्रभावित नहीं होगी।
विस्तृत गाइडलाइन जल्द होगी जारी
सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार जल्द ही प्रशासक के रूप में नियुक्त ब्लॉक प्रमुखों के अधिकार, दायित्व और कार्यक्षेत्र को लेकर विस्तृत गाइडलाइन जारी करेगी। इसमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि वे कौन-कौन से नियमित प्रशासनिक कार्य कर सकेंगे, किन मामलों में जिलाधिकारी की अनुमति आवश्यक होगी और कौन से निर्णय केवल शासन स्तर पर लिए जाएंगे।फिलहाल सरकार का उद्देश्य पंचायत चुनाव होने तक स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना और विकास कार्यों में किसी प्रकार का व्यवधान न आने देना है।