उत्तर प्रदेश में कुछ दिनों की अपेक्षाकृत कमजोर बारिश के बाद मानसून एक बार फिर पूरी सक्रियता के साथ लौट आया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के क्षेत्रीय मौसम केंद्र, लखनऊ के अनुसार आगामी पांच दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में वर्षा का व्यापक दौर जारी रहने की संभावना है। बंगाल की खाड़ी से लगातार आ रही नम हवाओं और सक्रिय मानसूनी तंत्र के प्रभाव से वातावरण में नमी बढ़ गई है, जिससे पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश दोनों क्षेत्रों में वर्षा की गतिविधियों में तेजी आने के संकेत मिल रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस दौरान कई स्थानों पर तेज हवाओं, गरज-चमक और वज्रपात की घटनाएं भी देखने को मिल सकती हैं, इसलिए लोगों को मौसम संबंधी सभी आधिकारिक परामर्शों का पालन करना चाहिए।
28 और 29 जुलाई को भारी से अत्यधिक वर्षा की संभावना
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 28 जुलाई को प्रदेश के अधिकांश जिलों में व्यापक वर्षा होने की संभावना है। कई क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की जा सकती है, जबकि मेघगर्जन और वज्रपात की घटनाएं भी साथ-साथ हो सकती हैं। 29 जुलाई को भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों और पूर्वी उत्तर प्रदेश के अनेक जिलों में वर्षा का सिलसिला जारी रहेगा। लगातार दो दिनों तक सक्रिय रहने वाला यह मानसूनी दौर कई स्थानों पर सामान्य जनजीवन को प्रभावित कर सकता है। मौसम विभाग ने विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने और आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने की सलाह दी है।
पांच दिनों तक जारी रहेगा वर्षा का सिलसिला
पूर्वानुमान के अनुसार 27 जुलाई से प्रारंभ हुआ वर्षा का यह क्रम 31 जुलाई तक विभिन्न तीव्रता के साथ जारी रहने की संभावना है। 30 और 31 जुलाई को भी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में हल्की से मध्यम तथा कुछ स्थानों पर भारी वर्षा दर्ज की जा सकती है। लगातार सक्रिय मानसूनी परिस्थितियों के कारण वातावरण में नमी बनी रहेगी और दिन के तापमान में गिरावट दर्ज होने की संभावना है। इससे उमस से राहत तो मिलेगी, लेकिन लंबे समय तक होने वाली वर्षा के कारण शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।
जलभराव, वज्रपात और यातायात बाधित होने की आशंका
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने चेतावनी दी है कि लगातार होने वाली वर्षा के कारण निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। नदियों, बरसाती नालों और जलाशयों का जलस्तर बढ़ने की संभावना भी व्यक्त की गई है। इसके अलावा सड़क और रेल यातायात प्रभावित हो सकता है तथा कुछ स्थानों पर बिजली आपूर्ति में भी व्यवधान आ सकता है। कच्चे मकानों, कमजोर संरचनाओं और पेड़ों को नुकसान पहुंचने की आशंका के साथ-साथ वज्रपात की घटनाओं से जन-धन और पशुधन को भी खतरा हो सकता है। ऐसे में प्रशासन और नागरिकों दोनों के लिए अतिरिक्त सतर्कता आवश्यक मानी जा रही है।
किसानों के लिए राहत भी, सावधानी भी जरूरी
लगातार हो रही वर्षा खरीफ फसलों के लिए लाभकारी मानी जा रही है, क्योंकि इससे धान, मक्का, दलहन और अन्य वर्षाकालीन फसलों को पर्याप्त नमी मिलेगी। हालांकि जिन क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा होगी, वहां खेतों में जलभराव फसलों को नुकसान भी पहुंचा सकता है। कृषि विशेषज्ञ किसानों को खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी की व्यवस्था बनाए रखने तथा मौसम साफ होने तक उर्वरक और कीटनाशकों के छिड़काव से बचने की सलाह दे रहे हैं। पशुपालकों को भी मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर रखने और खुले क्षेत्रों में चराने से बचने की आवश्यकता बताई गई है।
मौसम विभाग ने लोगों से बरतने को कहा विशेष एहतियात
मौसम विभाग ने नागरिकों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने, जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से परहेज करने तथा नदियों और मौसमी नालों के समीप न जाने की अपील की है। मेघगर्जन के समय खुले मैदानों, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है। वाहन चालकों को फिसलन भरी सड़कों पर धीमी गति से वाहन चलाने और कम दृश्यता की स्थिति में अतिरिक्त सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने भी लोगों से मौसम विभाग द्वारा जारी ताजा सूचनाओं और चेतावनियों पर लगातार नजर बनाए रखने का आग्रह किया है।