लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी बीच योगी सरकार ने पंचायत चुनाव की मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के नियमों में अहम बदलाव किया है। अब किसी ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए संबंधित गांव में कम से कम छह महीने तक लगातार रहना अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश पंचायत राज (सामान्य निवास अवधारणा) नियमावली-2026 को मंजूरी दे दी गई है। सरकार के इस फैसले के बाद पंचायत चुनाव में मतदाता बनने के लिए सामान्य निवास की शर्त पहले से अधिक स्पष्ट हो गई है। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ सकता है, जो गांव से संबंध होने के आधार पर वहां की मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराना चाहते हैं।
अब गांव में छह महीने लगातार रहना होगा जरूरी
नई नियमावली के तहत किसी व्यक्ति को ग्राम पंचायत क्षेत्र का सामान्य निवासी माने जाने के लिए वहां कम से कम छह महीने तक लगातार निवास करना होगा। पहले मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए 'मामूली तौर से निवासी' होने की शर्त का उल्लेख था, लेकिन इसके लिए कोई स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित नहीं थी। इसी वजह से कई बार सामान्य निवास को लेकर सवाल और विवाद सामने आते थे। अब सरकार ने छह महीने की न्यूनतम अवधि तय करके इस स्थिति को स्पष्ट करने की कोशिश की है। इसके अलावा संबंधित व्यक्ति की उस गांव में वास्तव में रहने की मंशा भी देखी जाएगी। यानी केवल कुछ समय के लिए गांव आना या वहां से पारिवारिक जुड़ाव होना पर्याप्त नहीं होगा। मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए वास्तविक निवास की शर्त पूरी करनी पड़ेगी।
मकान या जमीन होना नहीं होगा वोटर बनने का आधार
नई व्यवस्था में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि किसी गांव में मकान, जमीन या परिवार के सदस्य होने मात्र से व्यक्ति को उस ग्राम पंचायत का सामान्य निवासी नहीं माना जाएगा। सामान्य निवास का निर्धारण करते समय यह देखा जाएगा कि संबंधित व्यक्ति वास्तव में उस क्षेत्र में रह रहा है या नहीं। इसके साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि उसका वहां स्थायी रूप से रहने का इरादा है या नहीं। इस तरह गांव से केवल संपत्ति या रिश्तेदारी का संबंध रखने वाले लोगों के लिए मतदाता सूची में नाम दर्ज कराना आसान नहीं होगा। सरकार का उद्देश्य सामान्य निवास की परिभाषा को स्पष्ट करना और मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में एकरूपता लाना है। इससे उन मामलों की जांच करना भी आसान हो सकेगा, जिनमें किसी व्यक्ति के वास्तविक निवास को लेकर आपत्ति दर्ज कराई जाती है।
आधार कार्ड और बिजली बिल से देना होगा निवास का प्रमाण
ग्राम पंचायत क्षेत्र में रहने का प्रमाण देने के लिए संबंधित व्यक्ति को वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने पड़ सकते हैं। इनमें आधार कार्ड, बिजली बिल, टेलीफोन बिल और पते से जुड़े अन्य मान्य दस्तावेज शामिल हैं। इन प्रमाणों की मदद से अधिकारी यह जांच कर सकेंगे कि व्यक्ति संबंधित गांव में वास्तव में रह रहा है या नहीं। केवल दस्तावेज दिखाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि सामान्य निवास की अन्य निर्धारित शर्तों को भी पूरा करना होगा। दस्तावेजों के आधार पर व्यक्ति के पते और निवास की स्थिति का सत्यापन किया जा सकेगा। इसके बाद ही मतदाता सूची में नाम शामिल करने से संबंधित निर्णय लिया जाएगा। इस व्यवस्था से मतदाता सूची तैयार करने वाले अधिकारियों को जांच के लिए एक स्पष्ट आधार मिलेगा।
दूसरे गांव में नाम दर्ज कराने के लिए पुरानी सूची से हटाना होगा नाम
नई नियमावली में दोहरी मतदाता प्रविष्टियों को रोकने के लिए भी महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है। यदि कोई व्यक्ति अपना पुराना गांव छोड़कर दूसरे गांव में कम से कम छह महीने से रह रहा है और वहां की पंचायत मतदाता सूची में नाम दर्ज कराना चाहता है, तो उसे पहले पुराने निवास स्थान की मतदाता सूची से अपना नाम हटवाना होगा। इसका मतलब है कि एक ही व्यक्ति दो अलग-अलग ग्राम पंचायतों की मतदाता सूची में अपना नाम नहीं रख सकेगा। नए गांव में नाम दर्ज कराने के लिए वहां के सामान्य निवास से जुड़ी शर्तों को पूरा करना भी जरूरी होगा। इस नियम से उन लोगों की पहचान करना आसान हो सकता है, जिनका नाम एक से अधिक स्थानों की मतदाता सूची में दर्ज है। सरकार की इस पहल का उद्देश्य पंचायत चुनाव की मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है।
2015 के पंचायत चुनाव से जुड़ा है नियमावली का मामला
सामान्य निवास की अवधारणा को लेकर उत्तर प्रदेश में पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं। वर्ष 2015 के पंचायत चुनाव के दौरान यह सवाल उठा था कि आखिर किसी व्यक्ति को किसी ग्राम पंचायत का सामान्य निवासी किस आधार पर माना जाना चाहिए। इस मुद्दे को लेकर मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंचा था। अदालत ने सामान्य निवास से संबंधित स्थिति को स्पष्ट करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सरकार ने इस विषय पर स्पष्ट नियम बनाने की दिशा में कदम उठाया। अब कैबिनेट की मंजूरी के बाद उत्तर प्रदेश पंचायत राज (सामान्य निवास अवधारणा) नियमावली-2026 को लागू करने का रास्ता साफ हुआ है। नई नियमावली के जरिए सरकार ने सामान्य निवास की पहचान के लिए समय-सीमा और जरूरी मानकों को निर्धारित किया है।
पंचायत चुनाव की मतदाता सूची पर क्या पड़ेगा असर?
योगी सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा असर आगामी पंचायत चुनाव की मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया पर देखने को मिल सकता है। अब अधिकारियों को किसी व्यक्ति का नाम जोड़ने से पहले उसके सामान्य निवास की स्थिति की जांच करनी होगी। इसके लिए छह महीने तक लगातार गांव में रहने, वहां बसने की मंशा और पते से जुड़े दस्तावेजों को महत्वपूर्ण आधार बनाया जाएगा। वहीं, दूसरे गांव में रहने वाले लोगों को पुराने स्थान की मतदाता सूची से नाम हटवाने की प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी। इससे फर्जी या दोहरी मतदाता प्रविष्टियों पर रोक लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने को लेकर होने वाले विवादों में भी कमी आ सकती है। ऐसे में आगामी पंचायत चुनाव से पहले मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए नए नियमों को समझना बेहद जरूरी होगा।