लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता में उल्लेखनीय वृद्धि की है। अब तक ऐसे मामलों में प्रभावित परिवारों को 4 लाख रुपये की सहायता दी जाती थी, जिसे बढ़ाकर 8 लाख रुपये कर दिया गया है। इस निर्णय का उद्देश्य आपदा के कारण परिवार के कमाऊ सदस्य की मृत्यु होने पर उत्पन्न होने वाले आर्थिक संकट को कम करना है। अचानक आई बाढ़, आकाशीय बिजली, भूस्खलन, चक्रवात और अन्य अधिसूचित प्राकृतिक आपदाओं में होने वाली जनहानि के मामलों में संशोधित मानकों के अनुसार सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इससे उन परिवारों को आर्थिक संबल मिलने की उम्मीद है, जिन्हें किसी प्राकृतिक विपदा के कारण अपने प्रियजन के साथ आजीविका का सहारा भी खोना पड़ता है।
किसानों को फसल नुकसान पर अब 30 प्रतिशत तक अधिक मुआवजा
प्राकृतिक आपदाओं के कारण खेती को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए भी सरकार ने सहायता राशि बढ़ाई है। नई व्यवस्था के अंतर्गत सिंचित क्षेत्रों में फसल खराब होने पर किसानों को अब 17,000 रुपये के स्थान पर 22,000 रुपये प्रति हेक्टेयर मिलेंगे। इसी तरह वर्षा आधारित और असिंचित क्षेत्रों में फसल नुकसान पर मिलने वाली सहायता 8,500 रुपये से बढ़ाकर 11,000 रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है। बारहमासी फसलों और कृषि वानिकी को होने वाले नुकसान पर भी राहत राशि 22,500 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित की गई है। सरकार के अनुसार, संशोधित दरों से प्रदेश के 10 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है। यह सहायता उन किसानों के लिए महत्वपूर्ण होगी, जिनकी महीनों की मेहनत और कृषि निवेश प्राकृतिक आपदा के कारण बर्बाद हो जाते हैं।
कृषि भूमि की क्षति और खेतों से गाद हटाने पर भी बढ़ी सहायता
बाढ़ और अत्यधिक बारिश के कारण कृषि भूमि की उत्पादकता प्रभावित होने पर किसानों को होने वाली परेशानी को देखते हुए भूमि सुधार से जुड़ी सहायता भी बढ़ाई गई है। बाढ़ के बाद खेतों में जमा होने वाली गाद हटाने के लिए अब 18,000 रुपये के बजाय 23,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की आर्थिक सहायता मिलेगी। इसी तरह भूस्खलन और हिमस्खलन के कारण कृषि भूमि को नुकसान पहुंचने पर सहायता राशि 47,000 रुपये से बढ़ाकर 60,000 रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है। इन बदलावों का उद्देश्य केवल तत्काल आर्थिक नुकसान की भरपाई करना नहीं, बल्कि प्रभावित कृषि भूमि को दोबारा खेती योग्य बनाने में भी मदद करना है। प्राकृतिक आपदाओं के बाद खेतों में मिट्टी की ऊपरी परत, जल निकासी और भूमि की उपजाऊ क्षमता प्रभावित होने से किसानों को अगले कृषि चक्र में भी नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में बढ़ी हुई सहायता कृषि व्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने में उपयोगी साबित हो सकती है।
पशुधन की मौत पर पशुपालकों को मिलेगी अधिक आर्थिक मदद
उत्तर प्रदेश सरकार ने पशुधन को होने वाले नुकसान के मामलों में भी मुआवजे की दरों में वृद्धि की है। प्राकृतिक आपदा में गाय, भैंस, घोड़े और ऊंट जैसे बड़े पशुओं की मृत्यु होने पर अब 40,000 रुपये के स्थान पर 50,000 रुपये की सहायता दी जाएगी। बकरी, भेड़ और सूअर जैसे छोटे पशुओं की मृत्यु पर मिलने वाली राशि 4,000 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये कर दी गई है। वहीं, गधा और खच्चर जैसे भार ढोने वाले पशुओं के नुकसान पर सहायता 20,000 रुपये से बढ़ाकर 25,400 रुपये निर्धारित की गई है। मुर्गीपालन से जुड़े लोगों को भी राहत देते हुए प्रति मुर्गी सहायता राशि 100 रुपये से बढ़ाकर 130 रुपये कर दी गई है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुधन अनेक परिवारों की नियमित आय और आजीविका का महत्वपूर्ण आधार होता है। ऐसे में इन दरों में वृद्धि से आपदा प्रभावित पशुपालकों को अपने आर्थिक नुकसान से उबरने में कुछ अतिरिक्त सहायता मिल सकेगी।
रेशम उत्पादन करने वाले किसानों के लिए भी संशोधित दरें
सरकार ने रेशम उत्पादन से जुड़े किसानों और उत्पादकों को भी नई राहत व्यवस्था में शामिल किया है। एरी, शहतूत और टसर रेशम उत्पादन को प्राकृतिक आपदा से नुकसान पहुंचने पर सहायता राशि 6,000 रुपये से बढ़ाकर 7,800 रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है। वहीं, मूगा रेशम उत्पादन में नुकसान होने पर मिलने वाली सहायता 7,500 रुपये से बढ़ाकर 9,800 रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित की गई है। रेशम उत्पादन ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण माध्यम है और इससे बड़ी संख्या में छोटे उत्पादक जुड़े हुए हैं। बाढ़, अत्यधिक वर्षा और अन्य प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण रेशम उत्पादन की प्रक्रिया प्रभावित होने पर उत्पादकों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। नई दरों के माध्यम से सरकार ने इस क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी आपदा राहत के दायरे में अतिरिक्त आर्थिक सुरक्षा देने का प्रयास किया है।
मकान क्षतिग्रस्त होने पर भी मिलेगा अधिक मुआवजा
प्राकृतिक आपदाओं में मकानों को होने वाली क्षति के लिए भी सहायता के संशोधित मानक निर्धारित किए गए हैं। मैदानी क्षेत्रों में पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकान के लिए 1.85 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया है, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में यह राशि 2.06 लाख रुपये निर्धारित है। मैदानी क्षेत्रों में आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 93,000 रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। मकान का नुकसान किसी परिवार के लिए केवल संपत्ति की क्षति नहीं होता, बल्कि इससे उसके रहने, सुरक्षा और दैनिक जीवन की पूरी व्यवस्था प्रभावित हो जाती है। विशेषकर गरीब और सीमित आय वाले परिवारों के लिए घर का पुनर्निर्माण करना बेहद कठिन हो सकता है। ऐसे में निर्धारित सहायता राशि प्रभावित परिवारों को आवास की मरम्मत और पुनर्वास की दिशा में आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
राहत शिविरों में 30 दिन तक सहायता, सूखे में 90 दिन तक पेयजल व्यवस्था
आपदा के दौरान विस्थापित होने वाले परिवारों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए राहत शिविरों से जुड़े प्रावधान भी किए गए हैं। प्रभावित परिवारों को राहत शिविरों में 30 दिनों तक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था निर्धारित की गई है। वहीं, सूखे की स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों में 90 दिनों तक पेयजल सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। किसी बड़े प्राकृतिक संकट के दौरान सुरक्षित पेयजल, भोजन और अस्थायी आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में लंबे समय तक पेयजल संकट रहने से आम जनजीवन के साथ पशुधन और कृषि गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं। ऐसे में राहत अवधि और पेयजल सहायता से जुड़े प्रावधान आपदा प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
1 अप्रैल से 4 नवंबर 2026 तक के नुकसान पर भी मिलेगा लाभ
सरकार की ओर से संशोधित आपदा राहत मानकों का लाभ 1 अप्रैल 2026 से 4 नवंबर 2026 के बीच हुए पात्र नुकसान के मामलों में भी देने का निर्णय किया गया है। इसका अर्थ है कि इस अवधि में प्राकृतिक आपदाओं के कारण जिन किसानों और परिवारों को नुकसान हुआ है, उन्हें भी संशोधित दरों के अनुसार सहायता मिल सकेगी। राज्य आपदा मोचन निधि और राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि के तहत आर्थिक सहायता के नए मानक वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक प्रभावी रहेंगे। राहत विभाग के आंकड़ों के अनुसार, निर्धारित अवधि में प्रदेश के 10,02,684 किसानों की लगभग 52.14 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है। इसके अतिरिक्त 3,537 पशुओं की मृत्यु भी दर्ज की गई है। व्यक्तिगत लाभार्थियों को सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से भेजने तथा पात्रता और लाभार्थियों की सूची सार्वजनिक करने का भी प्रावधान किया गया है। इससे सहायता वितरण में पारदर्शिता और पात्र लोगों तक राहत पहुंचाने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।