हरिद्वार के सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिकों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। आए दिन अलग-अलग कंपनियों के मजदूर अपनी मांगों को लेकर श्रम विभाग कार्यालय पहुंच रहे हैं जिससे विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बीते चार दिनों में चार अलग-अलग कंपनियों के श्रमिक वेतन वृद्धि की मांग को लेकर धरना दे चुके हैं। कैंपस और लग्जर कंपनी के बाद अब जीनस और इंडो हर्बल कंपनी के मजदूर भी श्रम विभाग कार्यालय पहुंचे और अपनी सैलरी बढ़ाने की मांग उठाई।
श्रमिकों ने लगाया आरोप
लगातार बढ़ते विरोध प्रदर्शनों से साफ है कि श्रमिकों की समस्याओं के समाधान में विभागीय स्तर पर कहीं न कहीं कमी नजर आ रही है। कंपनियों के श्रमिकों का कहना है कि पिछले महीने उनकी सैलरी में बढ़ोतरी की गई थी लेकिन कंपनी ने केवल ₹1 प्रति घंटे की मामूली वृद्धि की है जबकि सरकार द्वारा निर्धारित वेतन वृद्धि इससे अधिक थी। श्रमिकों ने आरोप लगाया कि उन्हें ओवरटाइम का भुगतान भी केवल सिंगल रेट पर किया जाता है जबकि उनकी मूल सैलरी भी काफी कम है। इसके साथ ही कंपनी स्टाफ द्वारा दुर्व्यवहार किए जाने की शिकायत भी श्रमिकों ने उठाई है। श्रमिकों का कहना है कि उनकी मुख्य मांगें वेतन वृद्धि उचित ओवरटाइम भुगतान और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करना हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं तब तक उनका धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा।
कांग्रेस नेता वरुण बालियान ने किए सवाल
कांग्रेस नेता वरुण बालियान ने कहा कि श्रम विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह कंपनियों के श्रमिकों के साथ मजबूती से खड़े हैं और प्रशासन की कार्रवाई की निंदा करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन श्रमिकों और उनके समर्थन में आगे आने वाले लोगों पर मुकदमे दर्ज कर दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है। वरुण बालियान ने कहा कि हाल ही में कंपनी के श्रमिकों और उनके समर्थन में खड़े लोगों सहित कुल 22 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया जिसमें उनका नाम भी शामिल है। उन्होंने इसे विभाग की गलत कार्रवाई बताते हुए कहा कि वह हर परिस्थिति में श्रमिकों के साथ खड़े रहेंगे।
उपश्रम आयुक्त ने की श्रमिकों से अपील
उपश्रम आयुक्त विपिन कुमार ने बताया कि चौथी-पांचवीं कंपनी का मामला श्रम विभाग कार्यालय तक पहुंचा है। उन्होंने कहा कि पिछले महीने इंजीनियरिंग और नॉन-इंजीनियरिंग श्रमिकों के वेतन दरों में वृद्धि की गई थी लेकिन इसी को लेकर कुछ श्रमिकों के बीच गलतफहमी उत्पन्न हो गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नॉन-इंजीनियरिंग श्रमिक इंजीनियरिंग श्रमिकों के समान वेतन की मांग कर रहे हैं जबकि दोनों श्रेणियों के वेतनमान अलग-अलग निर्धारित हैं। इसी कारण श्रमिक अपनी मांगों को लेकर कार्यालय पहुंच रहे हैं जहां उन्हें समझाकर वापस भेजा जा रहा है। उपश्रम आयुक्त ने श्रमिकों से अपील की कि श्रम विभाग का कार्यालय उनकी समस्याओं के समाधान के लिए हमेशा खुला है। किसी भी प्रकार की समस्या होने पर वे सीधे विभाग से संपर्क करें और धरना-प्रदर्शन का रास्ता न अपनाएं।